दिल्ली के भारत मंडपम में जारी इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन वैश्विक स्तर के नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा, उसकी पहुंच और शासन ढांचे पर अपने-अपने दृष्टिकोण रखे। सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, गूगल के CEO सुंदर पिचाई और टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने संबोधित किया।
आयोजकों के मुताबिक समिट में 110 से ज्यादा देश शामिल हुए हैं। 20 से अधिक देशों के प्रमुख, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500 से ज्यादा AI लीडर यहां मौजूद हैं। इसके अलावा करीब 100 CEOs और फाउंडर्स, 150 अकादमिक व रिसर्चर, 400 CTOs और VPs तथा 100 से ज्यादा सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समिट में मौजूद प्रतिभागी AI को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में नई तकनीक पर संदेह स्वाभाविक होता है, लेकिन भारत के युवाओं ने AI को तेजी से अपनाकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रदर्शित समाधानों को ‘मेक इन इंडिया’ की भावना से जोड़ा।
“शुरुआत में कुछ लोगों को ऐसी तकनीक पर संदेह होता है, लेकिन जिस तरह हमारे युवा इसे अपना रहे हैं, वह एक बड़ा कदम है।” — नरेंद्र मोदी
भारत के डिजिटल मॉडल को मैक्रों ने उदाहरण बताया
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वह किया है, जो दुनिया में किसी और देश ने इस पैमाने पर नहीं किया। उन्होंने 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान, हर महीने 20 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने वाले पेमेंट सिस्टम और 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी का जिक्र किया।
मैक्रों ने कहा कि AI, GPU और चिप्स अब सीधे भू-राजनीति और मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचे से जुड़े शब्द बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव बेहतर परिणाम भी दे सकता है और जोखिम भी पैदा कर सकता है, इसलिए रणनीतिक विकल्पों का महत्व बढ़ गया है।
उन्होंने भारत के ‘सॉवरेन चॉइस’ यानी SML (स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स) को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक ये मॉडल टास्क-स्पेसिफिक हैं और स्मार्टफोन पर चलने के लिए डिजाइन किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने सरकार समर्थित पहला AI विकसित किया और स्टार्टअप्स को सस्ती दरों पर 38,000 GPUs उपलब्ध कराए।
“भारत ने बहुत सोच-समझकर संप्रभु विकल्प चुना है, और उसका असर दिख रहा है।” — इमैनुएल मैक्रों
AI का भविष्य ‘मुट्ठी भर देशों’ तक सीमित नहीं: गुटेरेस
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने AI पर वैश्विक असंतुलन की आशंका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI का भविष्य कुछ देशों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता। इस दिशा में 40 प्रमुख विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया गया है, जिसका संदेश है कि AI पर सबका अधिकार होना चाहिए।
गुटेरेस ने कहा कि AI के बारे में फैली आशंकाओं और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही बातों से आगे बढ़कर वास्तविक जानकारी के अंतर को कम करना होगा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के भीतर AI गवर्नेंस पर वैश्विक संवाद शुरू करने की जानकारी दी और मानव नियंत्रण व जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले ‘गार्डरेल्स’ की जरूरत बताई।
“हमें ऐसे सुरक्षा नियम चाहिए जो मानवीय नियंत्रण और जवाबदेही को सुरक्षित रखें।” — एंटोनियो गुटेरेस
उन्होंने विकासशील देशों में बुनियादी क्षमता निर्माण के लिए ग्लोबल फंड फॉर AI बनाने की अपील भी की।
बड़े निवेश और कंप्यूटिंग क्षमता पर जोर
गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि कंपनी अपने 15 बिलियन डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपए) के निवेश कार्यक्रम के हिस्से के रूप में एक फुल स्टैक AI हब स्थापित कर रही है। उन्होंने बताया कि इस हब में गीगावाट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और नया इंटरनेशनल सब-सी केबल गेटवे शामिल होगा।
पिचाई ने कहा कि सभी के लिए उपयोगी AI बनाने के लिए साहसिक फैसले जरूरी हैं। उनके मुताबिक AI अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और कठिन समस्याओं के समाधान में निर्णायक भूमिका निभा सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तकनीक की पहुंच अब तक सीमित रही है।
“हमें साहसिक कदम उठाने होंगे, क्योंकि AI अरबों लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकता है।” — सुंदर पिचाई
टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी भारत का पहला बड़े पैमाने पर ऑप्टिमाइज्ड नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर बना रही है। उन्होंने Anthropic के साथ साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि वर्ल्ड-क्लास AI रैक आर्किटेक्चर को टाटा की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता के साथ जोड़ा जाएगा। इसके साथ एक AI डेटा इनसाइट्स प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जा रहा है।
समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 16 फरवरी को किया था। यह पांच दिवसीय आयोजन है और चौथे दिन हुई इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि भारत AI नीति, क्षमता निर्माण और बड़े टेक निवेश के त्रिकोण पर समानांतर काम कर रहा है। मंच पर आए वक्तव्यों में एक साझा बिंदु यह रहा कि AI की अगली छलांग केवल तकनीक से नहीं, बल्कि शासन, पहुंच और लागत के संतुलन से तय होगी।