इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के मामले में मोहन सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी थी।
पहले जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
इस कार्रवाई से पहले नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। बाद में एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया का तबादला कर दिया गया था, जबकि इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया था। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने निलंबन और पद से हटाने का फैसला लिया है।
हाईकोर्ट में सरकार की रिपोर्ट पर उठा सवाल
इस पूरे मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बताया है कि इंदौर में दूषित पानी से केवल चार लोगों की मौत हुई है। सरकार की यह रिपोर्ट शुक्रवार को अदालत में पेश की गई। हालांकि, मृतकों के परिजन और विभिन्न अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार 15 मौतों की जानकारी सामने आई है, जिससे सरकार के आंकड़ों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अदालत में जारी है सुनवाई
मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की गई है। इससे पहले 1 जनवरी को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। सरकार ने पांच दिन बाद अपनी रिपोर्ट में चार मौतों की पुष्टि की है।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दूषित पानी से हुई मौतों के लिए राज्य की “डबल इंजन सरकार” को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस मामले में प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया है।
सरकार ने बताए मृतकों के नाम
राज्य सरकार ने अपनी 39 पन्नों की स्टेटस रिपोर्ट में चार मृतकों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी मृतक वरिष्ठ नागरिक थे और उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। उर्मिला की मौत 28 दिसंबर को हुई, जबकि तारा (60 वर्ष) और नंदा (70 वर्ष) की मौत 30 दिसंबर को दर्ज की गई। वहीं, हीरालाल (65 वर्ष) की मौत 31 दिसंबर को हुई। सरकार का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।