छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में सामने आई यह घटना किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देने वाली है। एक लावारिस थैले में रखी मिठाई ने देखते ही देखते एक खुशहाल परिवार को गहरे मातम में डुबो दिया। तीन दिनों के भीतर तीन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न यह साफ हो पाया है कि मिठाई में आखिर जहर क्या था, और न ही यह कि वह संदिग्ध थैला किसने और क्यों रखा। पुलिस और प्रशासन की ढीली जांच ने इस पूरे मामले को और भी रहस्यमय और डरावना बना दिया है।
यह दर्दनाक मामला तामिया रोड स्थित पीएचई कार्यालय से जुड़ा है। 8 जनवरी को कार्यालय परिसर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने एक थैला टांग दिया, जिसमें मिठाई का डिब्बा, नमकीन और सब्जियां रखी थीं। शाम के वक्त वहां तैनात चौकीदार दसरू यदुवंशी की नजर उस थैले पर पड़ी। आसपास पूछताछ करने के बावजूद जब कोई थैले का मालिक सामने नहीं आया, तो दसरू ने उसे अपना समझकर मिठाई खा ली। उसी दौरान पास में चाय की दुकान चलाने वाले मुकेश कथूरिया को भी मिठाई दी गई।
हालांकि मुकेश और उसकी मां ने मिठाई नहीं खाई, लेकिन उसके परिवार के अन्य सदस्यों—पिता सुंदरलाल, पत्नी संतोषी, बड़ी बेटी खुशबू और छोटी बेटी पूजा—ने मिठाई का सेवन कर लिया। रात होते-होते सभी की हालत बिगड़ने लगी। उल्टी-दस्त और बेचैनी की शिकायत के बाद सभी को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को सबसे पहले चौकीदार दसरू यदुवंशी की मौत हो गई। इसके बाद 13 जनवरी को सुंदरलाल ने दम तोड़ दिया। बुधवार को नागपुर इलाज के लिए ले जाई गई 24 वर्षीय खुशबू की भी मौत हो गई। फिलहाल संतोषी और पूजा नागपुर एम्स में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
तीन मौतों के बावजूद सबसे बड़ा सवाल अब भी जस का तस है—वह संदिग्ध पैकेट आखिर किसने रखा? पीएचई कार्यालय के आसपास नगर पालिका और बिजली कंपनी जैसे कई सरकारी दफ्तर मौजूद हैं। ऐसे में वहां सीसीटीवी कैमरे होने की पूरी संभावना है, लेकिन अब तक पुलिस की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि फुटेज की जांच हुई भी है या नहीं। इससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ता जा रहा है।
मिठाई में आखिर क्या ज़हरीला पदार्थ मिला था, यह भी अब तक रहस्य बना हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके से मिठाई के नमूने लेकर भोपाल की प्रयोगशाला भेजे हैं, लेकिन तीन मौतों के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विभाग की धीमी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संध्या मार्को का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मिठाई दूषित थी या उसमें किसी तरह का ज़हर मिलाया गया था। आसपास की दुकानों से भी नमूने लेने की बात कही गई है।
इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू खुशबू की मौत है। हाल ही में उसकी शादी हुई थी और उसकी चार माह की एक मासूम बच्ची है। मकर संक्रांति पर वह मायके आई थी, लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी यात्रा साबित होगी। मां की मौत के साथ ही उस नन्ही बच्ची के सिर से हमेशा के लिए ममता का साया उठ गया। पूरा परिवार सदमे में है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। पहली मौत चौकीदार दसरू यदुवंशी की हुई थी, लेकिन उसका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। जबकि उसके साथ ही मुकेश के परिवार के सदस्य भी बीमार पड़े थे। बाद में हुई दो मौतों में पोस्टमार्टम तो हुआ, लेकिन उनकी शॉर्ट पीएम रिपोर्ट भी अब तक नहीं आई है। इससे जांच पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब तक इस मामले में न कोई संदिग्ध सामने आया है, न कोई गिरफ्तारी हुई है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ की बात जरूर कर रही है, लेकिन जमीन पर उसका कोई ठोस नतीजा दिखाई नहीं दे रहा। न आरोपी है, न सुराग और न ही कोई स्पष्ट दिशा।
जुन्नारदेव थाना प्रभारी राकेश बघेल का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। थैला किसने रखा, इसकी जानकारी जुटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद ली जा रही है। उन्होंने दावा किया है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच के नतीजों का इंतजार कर रही है, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।