इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में शनिवार को कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से हालात बेकाबू हो गए, जिसके चलते नारेबाजी, धक्का-मुक्की और हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए कांग्रेस नेताओं को वाहनों में बैठाकर क्षेत्र से बाहर पहुंचाया, ताकि शांति बहाल की जा सके।
जांच समिति की मौजूदगी से भड़का विवाद
दरअसल, कांग्रेस की पांच सदस्यीय जांच समिति भागीरथपुरा में स्थानीय लोगों से बातचीत करने पहुंची थी। इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता वहां पहुंच गए और ‘बाहरी लोग वापस जाओ’ के नारे लगाने लगे। जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध प्रदर्शन के दौरान काले झंडे दिखाए गए, चूड़ियां फेंकी गईं और अफरा-तफरी के माहौल में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा की ओर चप्पल फेंकने की घटना भी सामने आई।
पुलिस की कार्रवाई, कई नेता हिरासत में
घटना की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल सीपी अमित सिंह समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार, प्रताप गरेवाल, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को हिरासत में ले लिया। सभी नेताओं को वाहनों में बैठाकर इलाके से बाहर ले जाया गया, जिससे तनाव कम हो सके।
दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा बढ़ा
इधर, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार, हीरालाल शीतल नगर, लक्ष्मी नगर में किसी परिचित से मिलने आए थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बाद में कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत होने की पुष्टि हुई।
भोपाल में सपा का प्रदर्शन, मंत्री से इस्तीफे की मांग
इस मामले को लेकर भोपाल में भी सियासी हलचल देखने को मिली। समाजवादी पार्टी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया और नेम प्लेट पर कालिख पोतकर विरोध जताया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने और मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
एम्स टीम ने किया लीकेज स्थल का निरीक्षण
वहीं, भोपाल से एम्स की एक टीम भागीरथपुरा पहुंची और पानी के लीकेज वाले स्थान का निरीक्षण किया। टीम ने अपने दौरे की जानकारी पहले ही इंदौर नगर निगम को दे दी थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान निगम का कोई अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिला। इससे प्रशासनिक समन्वय पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।