“सत्ता सुख नहीं, किसान सेवा ही संकल्प”: राज्यसभा में गरजे कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

New Delhi: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यसभा में एक ओजस्वी और तथ्यपरक संबोधन के माध्यम से मोदी सरकार की कृषि प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया।
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीति ‘सत्ता के स्वर्ण सिंहासन’ पर बैठने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण और ‘दरिद्र नारायण’ की सेवा का अनुष्ठान है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य किसान को केवल ‘अन्नदाता’ तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ‘ऊर्जादाता’ और ‘भाग्यविधाता’ बनाना है।

1. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF): खेत-खलिहान में आधुनिक क्रांति
कृषि मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 1 लाख करोड़ रुपये के ‘एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (AIF) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है।
उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि अब तक देश में:
  • 44,243 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए।
  • 25,854 प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र (Primary Processing Centers) बनाए गए।
  • 17,779 बड़े गोदाम और 2,827 कोल्ड स्टोरेज का निर्माण हुआ।
प्रभाव: मंत्री ने दावा किया कि इन आधुनिक सुविधाओं के कारण फसलों, विशेषकर फल और सब्जियों की बर्बादी (Post-harvest loss) में 5% से 15% तक की कमी आई है। इससे न केवल किसान का नुकसान बचा है, बल्कि बाजार में सही समय पर फसल बेचकर वह बेहतर मुनाफा कमा रहा है।
2. MSP और दलहन मिशन: 100% खरीद की ऐतिहासिक गारंटी
विपक्ष द्वारा MSP पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस नीत UPA सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को ठुकरा दिया था, जबकि मोदी सरकार ने उत्पादन लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP देने का काम किया है।
दालों में आत्मनिर्भरता का रोडमैप
मंत्री ने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत कुछ क्रांतिकारी घोषणाएं कीं:
  • असीमित खरीद: तुअर, मसूर और उड़द की खेती करने वाले किसानों से सरकार 100% उत्पादन खरीदने को तैयार है।
  • खरीद का रिकॉर्ड: उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि UPA के 10 वर्षों में मात्र 6 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी गई थी, जबकि मोदी सरकार ने अब तक 1.92 करोड़ मीट्रिक टन दाल खरीदकर किसानों के खातों में सीधा पैसा भेजा है।
  • लक्ष्य 2030-31: सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक भारत दालों के आयात पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर दे।
3. पराली प्रबंधन: किसान अपराधी नहीं, समाधान के भागीदार
दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर मंत्री ने किसानों का बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सर्दियों के प्रदूषण में पराली का योगदान मात्र 5% के आसपास है, बाकी प्रदूषण उद्योगों और वाहनों से होता है।

“पराली के लिए किसान को बदनाम करना बंद होना चाहिए। किसान मजबूर है, अपराधी नहीं। हम दंड नहीं, समाधान दे रहे हैं।” – शिवराज सिंह चौहान

सरकार के कदम:
  1. मशीनीकरण: ‘क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट’ (CRM) योजना के तहत पंजाब, हरियाणा और यूपी में 3.5 लाख से अधिक मशीनें दी गई हैं।
  2. हरियाणा मॉडल की सराहना: हरियाणा सरकार द्वारा पराली न जलाने पर पंचायतों को ₹1 लाख तक का इनाम और वैकल्पिक खेती पर ₹7,000 प्रति एकड़ की सहायता को उन्होंने ‘रोल मॉडल’ बताया।
  3. वेस्ट टू वेल्थ: पराली से बायो-CNG, एथेनॉल और थर्मल पावर प्लांट के लिए पैलेट्स बनाने के 11 प्लांट मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में शुरू किए गए हैं।
4. क्षेत्रीय विकास: पंजाब से तमिलनाडु तक एक समान दृष्टि
सदन में क्षेत्रीय भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि “हम सब भारत माँ के लाल हैं।”
  • पंजाब के लिए: उन्होंने बताया कि पंजाब में AIF के तहत लक्ष्य से अधिक ₹11,351 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला।
  • तमिलनाडु के लिए: ‘दलहन मिशन’ के तहत तमिलनाडु के किसानों को भी प्रति हेक्टेयर ₹10,000 की सहायता और बीज मिनी-किट उपलब्ध कराई जा रही है।
5. फसल विविधीकरण: पानी और पर्यावरण की सुरक्षा
शिवराज सिंह चौहान ने स्वीकार किया कि भारत चावल उत्पादन में दुनिया में नंबर वन (15 करोड़ टन) बन चुका है, लेकिन अत्यधिक धान की खेती से भूजल स्तर गिर रहा है।
वैकल्पिक खेती के लिए प्रोत्साहन राशि:
| फसल | सहायता राशि (प्रति हेक्टेयर) |
 | दलहन (दालें) | ₹9,000 |
| मक्का एवं जौं | ₹7,500 |
| हाइब्रिड मक्का | ₹11,500 |
| मोटा अनाज (Millets) | ₹7,500 |
उन्होंने किसानों से ‘डायरेक्ट सीडेड राइस’ (DSR) तकनीक अपनाने की अपील की, जिसमें खेत में पानी भरने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत में भारी कमी आती है।
6. “अन्नदाता से ऊर्जादाता”: मोदी युग की नई पहचान
मंत्री ने अंत में कहा कि पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से किसान अब अपने बंजर खेतों में सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा कर रहे हैं। इससे वे न केवल अपनी सिंचाई की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि सरकार को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं।
निष्कर्ष
राज्यसभा में शिवराज सिंह चौहान का संबोधन इस बात का प्रमाण था कि आने वाले वर्षों में सरकार का ध्यान ‘प्रति बूंद अधिक फसल’, ‘लागत में कमी’ और ‘भंडारण की मजबूती’ पर रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कृषि सुधारों की यह ग्राउंड रियलिटी भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की नींव रखेगी।