Bhopal News: भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ मध्य प्रदेश ने निर्णायक जंग छेड़ दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत प्रदेश की 14 से 15 वर्ष की 8 लाख किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का टीका लगाने का महालक्ष्य निर्धारित किया गया है। राजधानी भोपाल में इस मुहिम ने रफ्तार पकड़ ली है, जहाँ अब तक 200 से अधिक किशोरियों का टीकाकरण सफल रहा है।
90 दिनों का ‘मेगा प्लान’ और इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका
राज्य सरकार ने इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए 90 दिनों (3 माह) की सख्त समय-सीमा तय की है। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए NHM अब डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहा है। गुरुवार को भोपाल स्थित एनएचएम कार्यालय में ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मीट’ का आयोजन किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि आज के दौर में युवा और अभिभावक सूचनाओं के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं। ऐसे में इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और सही वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाना आसान होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अधिकतम पंजीकरण सुनिश्चित करना और वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट को खत्म करना है।
क्या है वैक्सीन का विज्ञान? विशेषज्ञों ने दी जानकारी
टीकाकरण को लेकर अक्सर अभिभावकों के मन में सुरक्षा संबंधी सवाल होते हैं। बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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वायरस मुक्त संरचना: इस वैक्सीन में कोई जीवित या संक्रामक वायरस नहीं होता। इसमें केवल ‘वायरस लाइक पार्टिकल्स’ (VLP) होते हैं, जो वायरस के बाहरी प्रोटीन की नकल मात्र हैं।
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इम्यूनिटी बूस्टर: इसमें एल्यूमिनियम सॉल्ट का उपयोग किया गया है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह अन्य नियमित टीकों में भी इस्तेमाल होता है।
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स्थिरता: वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसमें सुरक्षित स्टेबलाइजर और बफर साल्ट का प्रयोग किया गया है।
गार्डासिल-4: एक डोज, जीवनभर का बचाव
इस अभियान के तहत किशोरियों को गार्डासिल-4 (क्वाड्रीवेलेंट) वैक्सीन की सिंगल डोज दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की आयु में यह टीका लगवाने से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर का खतरा 80 से 85 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यह टीका मुख्य रूप से एचपीवी टाइप 16 और 18 (जो कैंसर के 70% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं) के साथ-साथ टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
आंकड़े जो डराते हैं, पर टीकाकरण है समाधान
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति चिंताजनक है। हर साल लगभग 1.25 लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं, जिनमें से करीब 75 हजार अपनी जान गँवा देती हैं। चूंकि इस कैंसर के लक्षण शुरुआती चरणों में स्पष्ट नहीं होते, इसलिए ‘बचाव ही उपचार है’ के सिद्धांत पर किशोरावस्था में ही टीकाकरण को सबसे प्रभावी हथियार माना जा रहा है।
प्रदेश भर में व्यवस्था और पंजीकरण की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले चरण के लिए 5.8 लाख डोज जिलों को रवाना कर दी हैं। भोपाल में एम्स, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित 18 केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध है।
कैसे कराएं पंजीकरण? अभिभावक U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म ($https://uwinselfregistration.mohfw.gov.in/login$) के माध्यम से स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे केंद्र पर जाकर भी टीकाकरण संभव है। प्रक्रिया के लिए उम्र का प्रमाण और अभिभावक की सहमति अनिवार्य है। रविवार और अवकाश को छोड़कर यह सत्र नियमित रूप से चलेंगे।