जनसुनवाई में जागी उम्मीद, किडनी पीड़ित बच्चे को मिली त्वरित मदद

इंदौर में 16 दिसंबर को आयोजित कलेक्टर जनसुनवाई एक बार फिर प्रशासन की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण बनी। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में हुई इस जनसुनवाई में जरूरतमंदों की समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना गया, बल्कि त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया गया। इसी क्रम में एक मासूम बच्चे के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगी।

11 वर्षीय आलोक की गंभीर बीमारी ने झकझोरा

जनसुनवाई के दौरान पेशे से ड्राइवर नितिन अपने 11 वर्षीय बेटे आलोक (परिवर्तित नाम) को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। नितिन ने बताया कि आलोक की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं और उसे नियमित रूप से डायलिसिस की जरूरत है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण इलाज का खर्च उठाना उनके लिए असंभव हो गया था। डायलिसिस के लिए जरूरी परमाकेथ (कैथेटर) की लागत भी उनकी पहुंच से बाहर थी।

कलेक्टर का त्वरित और संवेदनशील निर्णय

मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने बिना किसी देरी के मानवीय निर्णय लिया। उन्होंने तत्काल 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की। इसके साथ ही डायलिसिस के लिए आवश्यक परमाकेथ के खर्च हेतु अलग से 16 हजार 500 रुपये की राशि भी मंजूर की गई, जिससे इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

समाजसेवियों का सराहनीय सहयोग

कलेक्टर की पहल के बाद आलोक का आवश्यक इम्प्लांट शैल्बी हॉस्पिटल में कराया गया। इस दौरान समाजसेवी जय्यू जोशी और रितेश बाफना ने भी आर्थिक सहयोग कर मानवीय जिम्मेदारी निभाई। प्रशासन और समाजसेवियों के समन्वय से इलाज की राह आसान हो सकी।

एमवाय हॉस्पिटल में नि:शुल्क डायलिसिस शुरू

सभी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब मासूम आलोक का डायलिसिस एमवाय हॉस्पिटल में नि:शुल्क शुरू हो गया है। यह सुविधा मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली है और बच्चे के इलाज को नई दिशा मिली है।

जरूरतमंदों के लिए जनसुनवाई बनी भरोसे का मंच

यह घटना न केवल प्रशासन की संवेदनशील सोच को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जनसुनवाई जैसे मंच वास्तव में जरूरतमंदों के लिए राहत और उम्मीद का सहारा बन रहे हैं। आलोक और उसके परिवार के लिए यह सहायता एक नई शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आई है।