राघव चड्ढा ने AAP पर कसा तंज : बोले- करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड लोगों की मुट्ठी में कैद हुई पार्टी, अब BJP में दिखेगा नया अंदाज

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के संस्थापक सदस्य रहे और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम चुके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी पूर्व पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने AAP के मौजूदा कार्यतंत्र को ‘टॉक्सिक’ (जहरीला) बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस राजनीतिक उलटफेर के बीच राज्यसभा ने AAP के उन 7 सांसदों के भाजपा में विलय (Merger) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिन्होंने सामूहिक रूप से पाला बदला था।

AAP छोड़कर BJP जॉइन करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा, डॉ. संदीप पाठक और अशोक मित्तल।

सांसदों का सामूहिक पलायन: राज्यसभा में बढ़ा भाजपा का कद
राज्यसभा सचिवालय ने आधिकारिक तौर पर AAP के 7 सांसदों— राघव चड्ढा, हरभजन सिंह (भज्जी), स्वाति मालीवाल, डॉ. संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता के भाजपा में विलय को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही राज्यसभा में भाजपा के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जिससे सदन में सत्तापक्ष की स्थिति और भी मजबूत हो गई है।
राघव चड्ढा के वीडियो संदेश की 6 बड़ी बातें
राघव चड्ढा ने अपने वीडियो के जरिए समर्थकों के सवालों का जवाब दिया और पार्टी छोड़ने के पीछे की ‘इनसाइड स्टोरी’ बयां की:
1. टॉक्सिक वर्क कल्चर और घुटन
राघव ने कहा कि पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी का वर्क एनवायरनमेंट बेहद जहरीला हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां आपको स्वतंत्र रूप से काम करने और संसद में जनता की आवाज उठाने से रोका जाता था। चड्ढा के अनुसार, “जब कार्यस्थल पर आपकी मेहनत को दबाया जाए और आपको चुप रहने पर मजबूर किया जाए, तो वहां से निकलना ही एकमात्र विकल्प बचता है।”
2. चंद लोगों के हाथ की कठपुतली बनी पार्टी
चड्ढा ने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व और प्रबंधन पर हमला करते हुए कहा कि जिस मकसद के लिए इस पार्टी का गठन हुआ था, वह अब भटक गई है। अब यह पार्टी चंद भ्रष्ट (Corrupt) और कॉम्प्रोमाइज्ड (Compromised) लोगों के हाथों में फंस गई है, जो देशहित के बजाय निजी फायदों के लिए फैसले ले रहे हैं।
3. 15 साल का निवेश और अधूरा सपना
राजनीति में आने से पहले एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे राघव ने कहा कि उन्होंने अपने करियर और जवानी के कीमती 15 साल इस पार्टी को सींचने में लगा दिए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने खून-पसीने से पार्टी को खड़ा किया था, लेकिन आज की AAP वह पुरानी पार्टी नहीं रही जो शुचिता की बात करती थी।
4. “7 लोग गलत नहीं हो सकते”
पार्टी द्वारा ‘गद्दारी’ के आरोपों पर पलटवार करते हुए राघव ने तर्क दिया कि एक या दो व्यक्ति गलत हो सकते हैं, लेकिन जब 7 सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो दोष नेतृत्व और व्यवस्था में होता है। उन्होंने पहले पार्टी छोड़ने वाले शिक्षित और अनुभवी लोगों का भी हवाला दिया और पूछा कि क्या वे सभी गलत थे?
5. चड्ढा के पास थे 3 विकल्प
राघव ने खुलासा किया कि इस संकट की स्थिति में उनके पास तीन रास्ते थे:
  • पहला: राजनीति को पूरी तरह अलविदा कह देना।
  • दूसरा: उसी घुटन भरे माहौल में रहकर व्यवस्था सुधारने की कोशिश करना (जो उनके अनुसार संभव नहीं था)।
  • तीसरा: अपनी ऊर्जा और अनुभव को किसी ऐसी जगह लगाना जहां सकारात्मक राजनीति संभव हो। उन्होंने तीसरे विकल्प को चुना।
6. भविष्य का संकल्प: “मुद्दे उठाता रहूंगा”
अंत में उन्होंने समर्थकों को आश्वस्त किया कि भाजपा में जाने के बाद भी उनकी कार्यशैली नहीं बदलेगी। वे पहले की तरह ही ऊर्जा और जोश के साथ जनहित के मुद्दे उठाते रहेंगे, लेकिन अब भाजपा के साथ जुड़कर वे उन समस्याओं का समाधान (Solution) निकालने की बेहतर स्थिति में होंगे।
सियासी गलियारों में हलचल
राघव चड्ढा और अन्य दिग्गजों का यह पलायन आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये सभी सांसद पार्टी की ‘रणनीतिक कोर’ का हिस्सा थे। भाजपा ने इस विलय का स्वागत करते हुए इसे पीएम मोदी की नीतियों पर विश्वास की जीत बताया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति में इस बड़े फेरबदल का आने वाले समय में क्या असर पड़ता है।