भागीरथपुरा में पीड़ितों से मिले राहुल गांधी, CM  यादव बोले- ‘लाशों पर राजनीति कर रही कांग्रेस’

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। शनिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अचानक इंदौर पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ितों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है।

राहुल गांधी का प्रहार: ‘यह कैसा स्मार्ट सिटी मॉडल?’
राहुल गांधी सुबह करीब 11 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल गए, जहां दूषित पानी से बीमार हुए लोग भर्ती हैं। इसके बाद वे प्रभावित इलाके भागीरथपुरा पहुंचे। राहुल ने पीड़ितों को ढांढस बंधाया और कांग्रेस की ओर से 1-1 लाख रुपये की राहत राशि के चेक भी वितरित किए।
मीडिया से चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने सरकार के ‘अर्बन मॉडल’ पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
  • जिम्मेदारी से भाग रही सरकार: जिस शहर को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, वहां लोगों को साफ पानी तक नसीब नहीं है। लोग पानी पीकर मर रहे हैं, यह सरकार की विफलता है।
  • डर का माहौल: राहुल ने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों को डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता के तौर पर अपना कर्तव्य निभाने आए हैं।
  • सोशल मीडिया पर हमला: राहुल ने ‘X’ पर लिखा कि “डबल इंजन सरकार का नया मॉडल है—पानी, हवा और दवा में जहर, और जवाब मांगो तो बुलडोजर!”
मुख्यमंत्री का पलटवार: ‘हैदराबाद और हिमाचल पर चुप क्यों थे राहुल?’
राहुल गांधी के दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर ‘लाशों पर राजनीति’ करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने घटना को गंभीरता से लिया है और लापरवाही बरतने वाले IAS अधिकारियों तक को निलंबित कर दिया है।
सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी की चयनात्मक सक्रियता (Selective Activism) पर सवाल उठाते हुए कहा:
  1. हैदराबाद का जिक्र: जब हैदराबाद में दूषित पानी से मौतें हुईं, तब राहुल गांधी कहां थे? वहां उन्होंने एक शब्द क्यों नहीं बोला?
  2. हिमाचल प्रदेश: हिमाचल में भी 30 से ज्यादा लोगों की जान गई, लेकिन वहां कांग्रेस के नेता पीड़ितों से मिलने नहीं पहुंचे।
  3. वोट बैंक की राजनीति: सीएम ने कहा कि कांग्रेस को केवल वोट चाहिए, जनता उनके इस ‘नाटक’ को समझ चुकी है।
प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पानी के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग अभी भी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है, लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बता रहा है।
राहुल गांधी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहे। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इस त्रासदी की पूरी जवाबदेही ले, दोषियों को कड़ी सजा दे और पीड़ितों को उचित मुआवजा प्रदान करे।

साथ ही कांग्रेस पार्टी के ऑफिशियल एक्स पर अकाउंट से भी एक पोस्ट लिखा गया है- “भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जो लोग प्रभावित हुए हैं, मैं उनसे मिला हूं। कई परिवार के सदस्यों की मौत हुई है और कई बीमार हुए हैं। वादा किया गया था- देश को ‘स्मार्ट सिटी’ दी जाएंगी।

मगर ये स्मार्ट सिटी का नया मॉडल है, जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है। इंदौर में साफ पानी नहीं मिल रहा है। दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई है और यह सरकार का ‘अर्बन मॉडल’ है।

यह सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा अन्य शहरों में भी हो रहा है। लोगों को साफ पानी और हवा मिले, ये जिम्मेदारी सरकार की होती है, मगर वह इस काम में असफल है। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही, पीड़ितों को सही मुआवजा भी मिलना चाहिए, क्योंकि ऐसे हालात सरकार की लापरवाही से बने हैं।

आज भी यहां साफ पानी नहीं मिल रहा है। इसलिए लोग चाहते हैं कि यहां साफ पानी की व्यवस्था की जाए। जनता को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे पूरा किया जाना चाहिए। नेता विपक्ष होने के नाते मैं इनकी आवाज उठाने आया हूं, ये मेरी जिम्मेदारी है- मैं पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हूं।”