सांवेर में बारिश-तेज हवाओं से गिरी गेहूं की फसलें, मंत्री तुलसीराम सिलावट ने किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर में सांवेर विधानसभा क्षेत्र में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के बाद गेहूं की फसल को हुए नुकसान पर प्रशासनिक गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रभावित गांवों का दौरा कर खेतों की स्थिति देखी और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फसल क्षति का त्वरित और निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए रिपोर्ट प्राथमिकता से शासन को भेजी जाए।

मंत्री सिलावट ने दौरे के दौरान किसानों से सीधे चर्चा कर नुकसान की जानकारी ली। कई स्थानों पर तैयार फसल खेतों में गिरने की स्थिति सामने आई है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को निर्देशित किया कि प्रभावित गांवों में सर्वे कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो और उसकी प्रमाणिक रिपोर्ट शासन स्तर पर तुरंत भेजी जाए, ताकि राहत प्रक्रिया में देरी न हो।

किन गांवों में असर, क्या है मौजूदा स्थिति

प्रशासन के मुताबिक सांवेर क्षेत्र के कजलाना, बड़ोदिया खान, दर्जी कराड़िया, बालौदा टाकून, पोटलोद, चंद्रावतीगंज, पाल कांकरिया, रतनखेड़ी, बसान्द्रा, बीबीखेड़ी, खामोद आंजना और नाहरखेड़ा सहित आसपास के गांवों में फसल को असर पहुंचा है। इन इलाकों में कई खेतों में गेहूं की फसल आड़ी होकर गिर गई है। यह वह चरण है जब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है, इसलिए नुकसान का आर्थिक असर सीधे किसानों पर पड़ने की संभावना है।

ग्रामीण इलाकों से मिली प्रारंभिक जानकारी के आधार पर प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई है। अधिकारी नुकसान की श्रेणी, खेतवार स्थिति और पात्रता के आधार पर आकलन करने की तैयारी में हैं। सरकार का फोकस इस बात पर रखा गया है कि वास्तविक प्रभावित किसानों की पहचान में कोई त्रुटि न रहे और सर्वे प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

मंत्री का निर्देश: सर्वे में तेजी और रिपोर्ट सीधे शासन को

तुलसीराम सिलावट ने कहा कि सर्वे कार्य को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह नहीं, बल्कि प्राथमिक राहत कार्य की तरह लिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रभावित गांवों में टीमों की तैनाती सुनिश्चित हो और नुकसान का आकलन जल्द पूरा किया जाए। कलेक्टर को यह भी कहा गया कि सर्वे की प्रतिवेदन प्रक्रिया तेजी से पूरी कर शासन को भेजी जाए, ताकि मुआवजा स्वीकृति और वितरण में अनावश्यक विलंब न हो।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सर्वे पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र किसानों तक राहत का वास्तविक लाभ पहुंचना आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने जिला प्रशासन को निगरानी तंत्र मजबूत रखने और फील्ड स्तर से अपडेट लेने के निर्देश दिए। प्रशासनिक स्तर पर यह अपेक्षा रखी गई है कि प्रभावित परिवारों को समय पर सूचना और प्रक्रिया संबंधी सहायता भी दी जाए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अलग कार्रवाई

क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मंत्री सिलावट ने अधिकारियों से कहा कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें योजना के नियमों के अनुसार बीमा लाभ दिलाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज, नुकसान का रिकॉर्ड और दावों की प्रशासनिक जांच समयबद्ध ढंग से की जाए, ताकि बीमित किसानों को देरी का सामना न करना पड़े।

फसल क्षति के मामलों में आम तौर पर दो स्तरों पर राहत की जरूरत होती है—एक, राजस्व सर्वे के आधार पर सरकारी राहत; और दूसरा, बीमा योजना के तहत दावा निपटान। प्रशासन को दोनों प्रक्रियाओं को समानांतर चलाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसानों को राहत के लिए अलग-अलग चरणों में लंबा इंतजार न करना पड़े।

सरकार का रुख और किसानों को आश्वासन

दौरे के दौरान मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रभावित किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान की स्थिति में सरकार की प्राथमिकता राहत को समय पर जमीन तक पहुंचाना है। अधिकारियों को इस दिशा में सक्रिय रहकर कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

“किसान हितैषी सरकार किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी पात्र किसान को राहत से वंचित न रहना पड़े।” — तुलसीराम सिलावट

फिलहाल फोकस प्रभावित गांवों में सर्वे पूरा करने, प्रतिवेदन शासन को भेजने और पात्र किसानों तक राहत पहुंचाने पर है। आने वाले दिनों में सर्वे के विस्तृत आंकड़े सामने आने के बाद क्षति का परिमाण अधिक स्पष्ट होगा। प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई इसी डेटा के आधार पर तय की जाएगी।