मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। कोतवाली थाने में कई बेरोजगार युवाओं ने अलग-अलग आवेदन देकर आरोप लगाया है कि कृष्ण मोहन वर्मा उर्फ बंटी, निवासी वार्ड-14 बाराद्वारी, ने विभागीय भर्ती में चयन कराने का भरोसा देकर उनसे लाखों रुपये लिए। शिकायतों में वन विभाग, पशुपालन विभाग और डेयरी विभाग का नाम है।
आवेदकों का कहना है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली संपर्क वाला बताता था। उन्होंने पुलिस को बताया कि आरोपी ने रिटायर्ड आईएएस जेएन कंसोटिया का नाम लेकर भरोसा दिलाया कि नियुक्ति सुनिश्चित हो जाएगी। इसी दावे के आधार पर कई लोगों ने नकद और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए रकम दी। अब उनका आरोप है कि न नौकरी मिली और न पैसा वापस हुआ।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, रकम वापस मांगने पर 5 जनवरी 2026 तक लौटाने का आश्वासन दिया गया था। तय तारीख निकलने के बाद भी पैसा नहीं मिला। कुछ आवेदनों में जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी दर्ज कराया गया है। पुलिस ने इन बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया है।
पीड़ितों ने यह भी कहा कि आरोपी उन्हें भोपाल सचिवालय तक लेकर गया था। उनके मुताबिक, इसी वजह से उन्हें लगा कि आरोपी की उच्च स्तर पर पहचान है और भर्ती प्रक्रिया में उसका प्रभाव चल सकता है। हालांकि समय बीतने के बाद नियुक्ति पत्र नहीं आए और संदेह बढ़ने पर लोगों ने पैसा वापस मांगा।
शिकायतों में रकम के दावे अलग-अलग
मामले में एक बिंदु यह भी है कि पुलिस तक पहुंचे शुरुआती विवरण में 6 लाख रुपये की ठगी का उल्लेख किया गया, जबकि संलग्न अलग-अलग आवेदनों में इससे कहीं अधिक रकम देने के दावे हैं। जांच एजेंसी अब प्रत्येक आवेदन, भुगतान की तारीख, भुगतान के माध्यम और संबंधित गवाहों का मिलान कर रही है।
डेयरी विभाग में नौकरी दिलाने से जुड़ी एक शिकायत में बृजेश, जितेंद्र नेवारे, अक्षय पुष्पाद (राजगढ़) और समित मेवाड़ा (इकलेरा, राजस्थान) के नाम शामिल हैं। इनके आवेदन में कहा गया है कि प्रति पद 5 लाख रुपये की मांग बताई गई और शुरुआत में 3 लाख रुपये देने को कहा गया। शिकायत के मुताबिक, चारों ने मिलकर 12 लाख रुपये दिए। इसके बाद 2021 में 3 लाख और 6 लाख, तथा 2022 में 3 लाख रुपये और देने का दावा किया गया। इस आवेदन में कुल 24 लाख रुपये देने की बात लिखी गई है।
पशुपालन विभाग से संबंधित दूसरे आवेदन में आयुष बड़ोदिया निवासी नरसिंहगढ़ ने 2024 में 2.75 लाख रुपये देने का आरोप लगाया है। आवेदन में 25 हजार रुपये आरोपी के भाई को देने का भी जिक्र है। इस शिकायत के अनुसार कुल 3 लाख रुपये दिए गए।
इसी क्रम में रामबाबू सुतार, निवासी हिनौल्या, ने भी पशुपालन विभाग में नौकरी के नाम पर 3 लाख रुपये देने की शिकायत की है। एक अन्य आवेदन में नानूराम सुतार, निवासी हिनौतिया, से 6 लाख 60 हजार रुपये लेने का आरोप दर्ज है।
वन विभाग में नियुक्ति के नाम पर सामूहिक आवेदन
वन विभाग में नौकरी दिलाने के कथित आश्वासन को लेकर सात लोगों का सामूहिक आवेदन भी सामने आया है। इसमें सुनील नागर, भरत सौजनिया, विजय तंवर, पवन मांझी, हेमंत मिलाला, विकास सांवर और भारत राज के नाम शामिल हैं। सभी राजगढ़ के निवासी बताए गए हैं। आवेदन में आरोप है कि इनसे कुल 24 लाख 40 हजार रुपये लिए गए, लेकिन न नियुक्ति मिली और न रकम वापस की गई।
मामले में खास बात यह है कि शिकायतकर्ताओं ने भुगतान का तरीका भी अलग-अलग बताया है। कुछ रकम नकद देने का दावा है, जबकि कुछ लेनदेन बैंकिंग माध्यमों से होने की बात कही गई है। पुलिस अब उपलब्ध रसीद, बैंक एंट्री, मोबाइल चैट और कॉल डिटेल जैसे पहलुओं को भी खंगाल रही है, ताकि रकम के प्रवाह की पुष्टि की जा सके।
इस पूरे प्रकरण में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी का नाम शिकायतों में संदर्भ के रूप में सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, आवेदकों का आरोप यह है कि आरोपी ने उनका नाम और कथित पहचान बताकर भरोसा जीता। अधिकारी की ओर से इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
कोतवाली थाना राजगढ़ की टीआई मंजू मखेनिया ने कहा कि अलग-अलग आवेदनों को लेकर जांच चल रही है और हर दावे का सत्यापन किया जा रहा है।
“कई आवेदक हमारे पास आए हैं। हम अलग-अलग आवेदन लेकर उनकी जांच कर रहे हैं। बंटी वर्मा निवासी बाराद्वारी का नाम वे ले रहे हैं। नौकरी लगवाने के नाम पर राशि लेने का आरोप आवेदकों ने लगाया है। कुछ कैश दिया गया और कुछ ट्रांजेक्शन भी हुए हैं। पूरे मामले की जांच की जा रही है।” — मंजू मखेनिया, टीआई, कोतवाली थाना राजगढ़
फिलहाल मामला शिकायत और जांच के चरण में है। पुलिस ने कहा है कि दस्तावेजी साक्ष्य, भुगतान का रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।