बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए की ओर से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है।
पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि होने के बाद यह साफ हो गया है कि कुशवाहा 5 मार्च को बिहार विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस घोषणा के साथ ही बीजेपी ने अपने कोटे से नितिन नवीन और शिवेश राम के नामों पर भी मुहर लगा दी है।
एनडीए का समीकरण और कुशवाहा की एंट्री
बिहार की खाली हो रही 5 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने अब तक 3 उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट कर दिए हैं। बीजेपी के दो चेहरों के साथ उपेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आना एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग और सहयोगियों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आरएलएम के प्रवक्ता नितिन भारती के अनुसार, एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ही कुशवाहा के नाम पर सहमति बनी है।
हालाकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि क्या कुशवाहा की राह इतनी आसान होगी? गणित के हिसाब से बीजेपी और जेडीयू की दो-दो सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं। कुशवाहा को पांचवें उम्मीदवार के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिनके लिए एनडीए को कुछ अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ सकती है। लेकिन पार्टी नेताओं का दावा है कि संख्या बल उनके पक्ष में है और कोई “खेला” होने की गुंजाइश नहीं है।
पवन सिंह की उम्मीदों पर फिरा पानी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव भोजपुरी पावरस्टार पवन सिंह पर पड़ता दिख रहा है। लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे कि एनडीए पवन सिंह को राज्यसभा भेजकर उनके राजनीतिक कद को बढ़ा सकता है और काराकाट चुनाव के बाद पैदा हुई कड़वाहट को कम कर सकता है।
उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी ने फिलहाल बिहार से उनके राज्यसभा जाने के रास्ते बंद कर दिए हैं। अब अगर उन्हें किसी दूसरे राज्य (जैसे झारखंड या अन्य) से मौका नहीं मिलता है, तो यह उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा झटका होगा।
जेडीयू के पत्तों का इंतजार
अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू पर टिकी हैं। एनडीए के कोटे की बाकी बची 2 सीटों पर जेडीयू किसे मैदान में उतारती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा की वापसी और पवन सिंह की “नो-एंट्री” ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है।