रानीसराय के 250 पेड़ों को बचाने सड़कों पर उतरे बच्चे, रीगल तिराहे पर अनोखा शांतिपूर्ण प्रदर्शन, हाईकोर्ट की रोक के बीच बढ़ी मुहिम

मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए रानीसराय में करीब 250 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने का खतरा मंडरा रहा है। इसके विरोध में 15 फरवरी, रविवार को शाम 5 से 6 बजे के बीच रीगल तिराहे पर स्कूली बच्चों ने अनोखे अंदाज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जनहित पर्यावरण मंच के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने पेड़, तोते और भगवान का रूप धारण कर जनता को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया।

बच्चों ने प्रशासन से पूछे सीधे सवाल

प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने प्रशासन और व्यवस्था से सीधे सवाल उठाए। उनका कहना था कि क्या भविष्य में उन्हें साफ हवा, स्वच्छ पानी और हरे-भरे पेड़ नसीब नहीं होंगे। बच्चों ने यह भी पूछा कि क्या आने वाले समय में मास्क पहनकर जीवन गुजारना होगा। पेड़ों पर रहने वाले हजारों तोतों के आशियाने को बचाने की गुहार भी लगाई गई।

स्कूलों और कोचिंग सेंटरों से जुटाए गए बच्चे

जनहित पर्यावरण मंच के कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के लिए शहर के विभिन्न स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में संपर्क किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में बच्चे रीगल तिराहे पर एकत्रित हुए। कई बच्चों ने पेड़ों और तोतों का वेश बनाकर अपनी बात रखी। शहर के गणमान्य नागरिक और कई संस्थाएं भी इन पेड़ों और परिंदों के बसेरे को बचाने के लिए काफी समय से सक्रिय हैं।

पहले हो चुका है 30 दिन का धरना

जनहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन के नेतृत्व में नए साल में 1 जनवरी से 30 जनवरी तक कड़कड़ाती ठंड में रानीसराय परिसर में दिन-रात का धरना दिया जा चुका है। इस आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को व्यापक जन-समर्थन दिलाया।

हाईकोर्ट ने पेड़ काटने पर लगाई रोक

कुछ पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पहली ही सुनवाई में कोर्ट ने 16 फरवरी तक रानीसराय के पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यह रोक स्थायी की जाए ताकि हजारों तोतों को अपना बसेरा न खोना पड़े। अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित है।

कई संगठनों ने दिया समर्थन

15 फरवरी के इस प्रदर्शन में जनहित पार्टी, पर्यावरण प्रेमी मंच, खंडेलवाल जनमंच, अभ्यास मंडल, जीवन प्रवाह, आम आदमी पार्टी और कई अन्य समाजसेवी संस्थाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी संगठनों ने एकजुट होकर पेड़ों और पर्यावरण को बचाने का संकल्प दोहराया।

यह प्रदर्शन हाईकोर्ट की अगली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले हुआ, जिससे इस मुद्दे पर जनदबाव और बढ़ने की संभावना है। पर्यावरणविदों का कहना है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन जरूरी है और मेट्रो स्टेशन के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशा जाना चाहिए।