रतलामी सेव और सोने के लिए विश्व प्रसिद्ध है रतलाम, जानिए इस शहर का गौरवशाली इतिहास

Ratlam : मध्य प्रदेश का रतलाम जिला अपनी कई खासियतों के लिए देशभर में मशहूर है। जब भी रतलाम का नाम आता है, तो सबसे पहले जुबान पर रतलामी सेव का स्वाद आता है, जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। लेकिन यह शहर सिर्फ अपनी नमकीन के लिए ही नहीं, बल्कि कई और वजहों से भी अपनी एक अलग जगह रखता है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित यह शहर अपने शुद्ध सोने और खूबसूरत साड़ियों के लिए भी जाना जाता है। यहां की संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत इसे और भी खास बनाती है।

1652 में रखी गई थी नींव

रतलाम शहर का इतिहास करीब चार सौ साल पुराना है। इतिहासकारों के अनुसार, इस शहर की स्थापना साल 1652 में जोधपुर के राजा उदय सिंह के परपोते राजा रतन सिंह राठौर ने की थी। बताया जाता है कि शहर का पुराना नाम ‘रतराम’ था, जो राजा रतन सिंह और उनके पहले पुत्र राम सिंह के नामों को मिलाकर रखा गया था। जबकि आधुनिक शहर की स्थापना 1829 में, कैप्टन बोर्थविक ने नियमित और चौड़ी सड़कों और अच्छी तरह से निर्मित घरों के साथ आज के रतलाम शहर की नींव रखी। 

सेव, सोना और साड़ी: रतलाम की पहचान

रतलाम की सबसे बड़ी पहचान यहां का सेव है, जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी निर्यात होता है। इसके अलावा, रतलाम का सोना अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहां के सराफा बाजार की देश में एक अलग ख्याति है। साथ ही, यहां का साड़ी बाजार भी काफी लोकप्रिय है, जहां खास किस्म की रतलामी साड़ियां मिलती हैं।

कृषि और संस्कृति का संगम

व्यापार के साथ-साथ रतलाम एक कृषि प्रधान क्षेत्र भी है। यहां मुख्य रूप से सोयाबीन, गेहूं, कपास और अफीम की खेती की जाती है। मालवा क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण, यहां की संस्कृति पर मालवी परंपराओं की गहरी छाप दिखती है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों, रीति-रिवाजों और त्योहारों के लिए भी जाना जाता है, जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।