RBI का नया नियम: 10 हजार से ऊपर के भुगतान पर ‘टाइम लैग’ की टेंशन खत्म, अपनाएं ‘व्हाइटलिस्टिंग’ का स्मार्ट तरीका

New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल ट्रांजेक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए लागू किए गए नए नियमों को लेकर आम जनता के बीच काफी चर्चा है। विशेष रूप से ₹10,000 से अधिक के भुगतान पर 1 घंटे के ‘टाइम लैग’ (देरी) के प्रावधान ने कई लोगों को चिंतित कर दिया है। लेकिन इस समस्या का समाधान आरबीआई के ‘व्हाइटलिस्टिंग’ (Whitelisting) फीचर में छिपा है, जो बड़े भुगतान को भी पलक झपकते ही पूरा कर सकता है।
क्या है व्हाइटलिस्टिंग?
व्हाइटलिस्टिंग आपके डिजिटल वॉलेट या बैंकिंग ऐप की एक ऐसी ‘भरोसेमंद लिस्ट’ है, जिसमें आप उन खातों को जोड़ सकते हैं जिन्हें आप बार-बार पैसे भेजते हैं। इसमें आपके परिवार के सदस्य, मित्र, किराना स्टोर या नियमित बिजली-पानी के बिल वाले खाते शामिल हो सकते हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा: यदि आप व्हाइटलिस्ट में शामिल किसी व्यक्ति या संस्था को ₹10,000 से ज्यादा की राशि भेजते हैं, तो उस पर 1 घंटे की देरी वाला नियम लागू नहीं होगा और पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाएगा।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
व्हाइटलिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी तरह से ग्राहक की सहमति और सुरक्षा पर आधारित है:
  1. यूजर की अनुमति: ग्राहक अपने बैंक ऐप के माध्यम से यह खुद तय करता है कि किस खाते को ‘सुरक्षित लिस्ट’ में डालना है।
  2. आपात स्थिति में मददगार: मेडिकल इमरजेंसी, स्कूल फीस या अचानक किसी जरूरी खरीदारी के समय यह फीचर बहुत काम आता है, क्योंकि इसमें पेमेंट बिना किसी रुकावट के पूरा होता है।
  3. सुरक्षा और सुविधा का बैलेंस: आरबीआई का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन फ्रॉड को रोकना है। व्हाइटलिस्टिंग के जरिए बैंक यह सुनिश्चित करता है कि पैसा केवल उन्हीं हाथों में जा रहा है जिन्हें आप पहले से जानते हैं।
निष्कर्ष….
डिजिटल इंडिया के दौर में आरबीआई का यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि आप भी नए नियमों के कारण देरी से बचना चाहते हैं, तो आज ही अपने बैंकिंग ऐप में जाकर नियमित भुगतान वाले खातों को ‘व्हाइटलिस्ट’ करें। इससे आपकी सुरक्षा भी बनी रहेगी और लेनदेन में देरी भी नहीं होगी।