13-15 मार्च को समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, शताब्दी वर्ष के एजेंडे पर होगी अहम चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक इस बार हरियाणा के समालखा में आयोजित की जा रही है। तीन दिवसीय यह बैठक 13, 14 और 15 मार्च 2026 को ग्रामविकास एवं सेवा साधना केन्द्र, पट्टीकल्याणा में होगी। संघ की कार्यप्रणाली में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को सर्वोच्च निर्णायक इकाई माना जाता है, इसलिए इसके निर्णयों को संगठनात्मक दिशा तय करने वाला मंच समझा जाता है।

संघ हर वर्ष यह बैठक आयोजित करता है, लेकिन 2026 का सत्र शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अलग महत्व रखता है। इस बैठक में शताब्दी निमित्त चलाए गए प्रमुख कार्यक्रमों के अनुभव और परिणामों पर विशेष चर्चा होगी। इनमें विजयादशमी उत्सव, गृहसंपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिक गोष्ठियां और सामाजिक सद्भाव बैठकों जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन अभियानों के क्रियान्वयन, क्षेत्रीय अनुभव और आगे की रणनीति पर प्रतिनिधियों से विस्तृत निवेदन लिया जाएगा।

शताब्दी वर्ष के कामकाज की समीक्षा पर रहेगा फोकस

बैठक में वर्ष 2025-26 के संघ कार्य की समग्र समीक्षा रखी जाएगी। अलग-अलग प्रांतों में हुए विशेष कार्यों का विवरण भी प्रस्तुत किया जाएगा। संगठनात्मक स्तर पर किन क्षेत्रों में विस्तार हुआ, किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और किन विषयों पर अगले चरण की तैयारी करनी है, इस पर विचार-विमर्श होगा। संघ के दृष्टिकोण से यह समीक्षा अगले वर्ष की योजना निर्धारण का आधार मानी जाती है।

बैठक के एजेंडे में वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा भी शामिल है। इसी क्रम में कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना जताई गई है। संघ की शाखाओं के माध्यम से अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन के कार्यों की प्रगति पर भी रिपोर्ट रखी जाएगी। विशेष रूप से पंच परिवर्तन के प्रयासों की स्थिति, उपलब्धियां और आगे की प्राथमिकताएं चर्चा का प्रमुख हिस्सा रहेंगी।

प्रशिक्षण वर्ग और आगामी वर्ष की योजना पर निर्णय

प्रतिनिधि सभा में संघ शिक्षा वर्ग, कार्यकर्ता विकास वर्ग और अन्य प्रशिक्षण वर्गों की योजनाओं पर अलग से विचार किया जाएगा। प्रशिक्षण ढांचे में आवश्यक बदलाव, कार्यकर्ता निर्माण की पद्धति और प्रांतीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रमों की रूपरेखा पर सहमति बनाई जाएगी। बैठक का एक मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष की संघ कार्य योजना का निर्धारण भी है, ताकि राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर कार्यक्रमों का समन्वय स्पष्ट हो सके।

इस सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। कार्यकारिणी के सदस्य भी बैठक में भाग लेंगे। प्रतिनिधि सभा में मुख्य रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ प्रांत और क्षेत्र स्तर के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। कुल 1489 कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अपेक्षित बताई गई है।

बैठक में संघ प्रेरित 32 विविध संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री और संगठन मंत्री भी भाग लेंगे। इससे प्रतिनिधि सभा का दायरा केवल संघ के आंतरिक संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समन्वित सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों के साझा आकलन का मंच भी बनेगा। विभिन्न संगठनों से मिलने वाला फीडबैक आगामी कार्यक्रमों की प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी माना जा रहा है।

समालखा में होने वाला यह तीन दिवसीय सत्र संघ के लिए नीति, समीक्षा और योजना का संयुक्त मंच होगा। शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में संगठनात्मक अनुभवों को संकलित कर अगले चरण की दिशा तय करना इस बैठक का केंद्रीय उद्देश्य रहेगा। 13 से 15 मार्च 2026 के बीच होने वाली चर्चा और निर्णय आने वाले कार्यकाल के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे।