राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली और विचारधारा को लेकर एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की है। भोपाल में आयोजित ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संघ किसी भी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है। यह एक सामाजिक संगठन है जिसका उद्देश्य समाज का निर्माण करना है।
भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ को केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई इन संगठनों को देखकर संघ को समझने का प्रयास करेगा, तो वह संघ के मूल विचार तक कभी नहीं पहुंच पाएगा।
हिंदुत्व जाति नहीं, एक मनोवृत्ति है
रवींद्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने हिंदुत्व की परिभाषा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, बल्कि एक मनोवृत्ति है। यह एक ऐसी जीवन पद्धति है जो सभी पंथों और संप्रदायों का सम्मान करती है। भागवत ने कहा कि हिंदू, हिंदवी और भारत, ये तीनों एक ही हैं और सनातन काल से प्रासंगिक बने हुए हैं। संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करना था।
तीन भाषाओं को सीखने पर जोर
भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए मोहन भागवत ने युवाओं को तीन तरह की भाषाएं सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने राज्य की भाषा, अपने देश की भाषा और विश्व की भाषा आनी चाहिए। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें उनसे सीखना चाहिए कि एक विशाल राष्ट्र को कैसे संगठित रखा जा सकता है।
वैश्विक स्तर पर संघ की स्वीकार्यता
संघ के विस्तार पर चर्चा करते हुए भागवत ने बताया कि आज देश-विदेश के कई संगठन और साधु-संत संघ के साथ जुड़े हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों से लोग संघ की कार्यपद्धति को समझने के लिए आते हैं। वे अक्सर यह सवाल करते हैं कि संघ अपने युवाओं को किस तरह प्रशिक्षित और संस्कारित करता है। कई बार वे अपने यहां भी इसी तरह की ट्रेनिंग देने का आग्रह करते हैं।
संघ का काम समाज को जोड़ना
मोहन भागवत ने संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का काम समाज को तोड़ना नहीं, बल्कि जोड़ना है। संघ का लक्ष्य संस्कार देना और उत्तम जीवन मूल्यों का निर्माण करना है। यह किसी एक संगठन या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा संपूर्ण समाज निर्माण का है।