प्रखर -वाणी
विश्व का बहुचर्चित निष्काम कर्मयोगी संगठन है आरएसएस…जिसने पर्दे के पीछे रहकर कार्य करने वालों में आगे आने की लगा दी रेस…अपने सौ वर्षों की यात्रा में जिसने कभी व्यक्ति पूजा को महत्व नहीं दिया…भगवा को गुरु मानकर सदैव स्वयंसेवको ने सादर ध्वज प्रणाम किया…हर कार्य को शुचिता से सम्पन्नता तक ईमानदार रहे…जिसके छोटे मोटे हर प्रकल्प सफल व शानदार रहे…किसी शासकीय अनुदान के दम पर संगठन नहीं चलाया…न ही किसी चंदे के धंधे को कार्यान्वयन हेतु अपनाया…
समाज की सहभागिता सुनिश्चित की फिर समाज के ही मुद्दों पर काम किया…अनेक क्षेत्रों के पृथक पृथक संगठनों को अनुषांगिक नाम दिया…समाज की सहभागिता है इसलिए समाज के प्रति जिम्मेदारी को स्वयं स्वीकार किया…प्रतिनिधि सभा करके उसमें समाज की हिस्सेदारी को अंगीकार किया…संघ के सामाजिक प्रभाव व समाज में हो रहे सकारात्मक बदलाव पर प्रतिनिधि सभा मंथन करेगी…देशभर के 1482 पदाधिकारियों की गम्भीर टोली सक्रियता पूर्वक विमर्श करेगी…विश्व के इतिहास में आरएसएस एकमात्र संगठन है जिसकी देशभर में 51,570 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित होती है…
संघ ही ऐसा है जिसके देशभर में 89,706 नियमित सेवा प्रकल्प के रूप में शिक्षा , स्वास्थ्य , स्वावलम्बन व सामाजिक सरोकार की गतिविधि संचालित होती है…कर्नाटक के बेंगलूर शहर में देश 1482 हीरे अपने मूल संगठन के शताब्दी पर्व को चमकाने हेतु आतुर हैं…जो आरएसएस के विरुद्ध नकारात्मक धारणा रखते हैं वे त्याग दे जो दिमाग में भरा फितूर है…तेलंगाना के इंदूरनगर में धर्मांतरण रोकना हो या मध्यप्रदेश के अलीराजपुर के आमखुर गांव में सेवाकार्य करना हो…छतरपुर जिले के 1913 गांव में एक ही श्मशान में अंतिम संस्कार से सामाजिक समरसता स्थापित करना हो या बृज क्षेत्र के बरसाना में परिक्रमा मार्ग को चार फीट चौड़ा करना हो…ये सबकुछ सम्भव हुआ है संघ के स्वयंसेवकों की बदौलत…जिनको नही चाहिए कोई सम्पत्ति नही कोई दौलत…ऐसे आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार जी से लगाकर गुरुजी तक और वर्तमान माननीय सरसंघचालक जी तक की यात्रा महान है…अपनी स्थापना का सौवाँ वर्ष मनाने वाला संघ वास्तव में सारा जहान है ।