यात्रियों की जान की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिवहन विभाग ने इंदौर में स्लीपर बसों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल के महीनों में स्लीपर बसों में आग लगने और गंभीर हादसों की घटनाओं को देखते हुए अब इंदौर में सघन जांच अभियान शुरू किया गया है। आरटीओ ने साफ शब्दों में बस संचालकों को चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीते दो दिनों में आधा दर्जन से अधिक स्लीपर बसों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
सुरक्षा मानकों के पालन के स्पष्ट निर्देश
एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार स्लीपर बसों में बस बॉडी कोड AIS-119 और AIS-052 के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसी क्रम में एआरटीओ राजेश गुप्ता के नेतृत्व में जिले के सभी स्लीपर बस संचालकों और मालिकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन्हें नियमों की पूरी जानकारी दी गई और एक माह के भीतर सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बस संचालकों से लिखित आश्वासन भी लिया गया कि वे निर्धारित समय सीमा में अपनी बसों में FDSS सिस्टम स्थापित कराएंगे।
दो दिनों तक शहरभर में चला निरीक्षण अभियान
परिवहन विभाग की टीम ने तीन इमली रोड, तीन इमली बस स्टैंड, राजीव गांधी चौराहा और चोइथराम रोड सहित विभिन्न स्थानों पर स्थित बस यार्डों में जांच की। निरीक्षण के दौरान कई स्लीपर बसों में अवैध पार्टीशन दरवाजे पाए गए, जिन्हें मौके पर ही हटवाया गया। कुछ बसों में FDSS सिस्टम नहीं मिला, जबकि कई वाहनों में आपातकालीन उपकरण अधूरे या अनुपस्थित पाए गए।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली एक स्लीपर बस की फिटनेस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई। इसके साथ ही निजी एटीएस सेंटरों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जो बसें तय मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, उनकी फिटनेस प्रमाणित न की जाए। परिवहन विभाग ने संकेत दिया है कि आगे भी इस तरह की लापरवाही सामने आने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर में 489 स्लीपर बसें पंजीकृत
आरटीओ के अनुसार इंदौर जिले में कुल 489 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं, जिनमें से 70 से अधिक बसें फिलहाल ऑफ-रोड स्थिति में हैं। विभाग ने दोहराया है कि यात्री सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।
स्लीपर बसों के लिए तय किए गए अनिवार्य सुरक्षा नियम
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्लीपर बसों में ड्राइवर केबिन और यात्री केबिन के बीच किसी भी प्रकार का पार्टीशन दरवाजा नहीं होना चाहिए। स्लीपर बर्थ के साथ स्लाइडर या स्टोरेज की व्यवस्था पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। सभी बसों में FDSS (फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम) अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा कम से कम 10 किलो क्षमता का अग्निशमन यंत्र (ग्रीन ज़ोन) उपलब्ध होना जरूरी है।
बस की लंबाई के अनुसार 4 से 5 आपातकालीन द्वार अनिवार्य होंगे। साथ ही VLTD, पैनिक बटन और स्पीड गवर्नर पूरी तरह चालू हालत में होने चाहिए। ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हर बस में फर्स्ट-एड बॉक्स होना अनिवार्य है और चालक द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।