Indore News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के नगर निगम में 8,455 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट पर चर्चा के दौरान बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जहाँ भाजपा पार्षदों ने ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ सदन का माहौल गरमाया, वहीं कांग्रेस ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सुरक्षा के कड़े पहरे में चर्चा
बजट सत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए दर्शक दीर्घा में प्रवेश से पहले बाउंसरों द्वारा सख्त चेकिंग की गई। सदन के भीतर बहस उस समय तेज हो गई जब कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने निगम की संपत्तियों और भूमि प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारियों को विभाग की संपत्तियों की सटीक जानकारी ही नहीं है।
भदौरिया ने कहा, “जब भी जानकारी मांगी जाती है, अधिकारी एक विभाग से दूसरे विभाग की ओर भेज देते हैं, उनके पास कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने शहर में ‘संजीवनी केंद्रों’ की घटती संख्या पर भी आपत्ति जताई।
महापौर का आश्वासन और मास्टर प्लान
विपक्ष के आरोपों पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि पार्षदों द्वारा उठाए गए सभी सवालों के जवाब सात दिनों के भीतर दे दिए जाएंगे। उन्होंने सभापति मुन्नालाल यादव से आग्रह किया कि जानकारी साझा करने के लिए एक स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
बजट की प्राथमिकता: पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर
इस वर्ष के बजट में इंदौर के बुनियादी ढांचे और जल आपूर्ति पर विशेष फोकस रखा गया है:
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नर्मदा परियोजना: चौथे चरण के काम को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें नई पाइपलाइन बिछाना और पुरानी लाइनों को बदलना शामिल है।
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अमृत-2 योजना: लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज सिस्टम, पानी की टंकियां और वार्ड-स्तरीय टेस्टिंग लैब बनाई जाएंगी।
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सड़कें और विकास: मास्टर प्लान के तहत रुकी हुई सड़कों और अधूरी परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हंगामे और नारों के बीच बजट पर चर्चा जारी है, जहाँ शहर के विकास के रोडमैप को अंतिम रूप दिया जा रहा है।