भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर बुधवार को बांग्लादेश की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे का उद्देश्य बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष रहीं बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होना है। खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं। उनके निधन से बांग्लादेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।
बुधवार को होगा अंतिम संस्कार, तीन दिन का राजकीय शोक
बेगम खालिदा जिया को बुधवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उन्हें उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया जाएगा। उनके निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। साथ ही, अंतिम संस्कार के दिन देशभर में सार्वजनिक अवकाश भी रहेगा। खालिदा जिया लंबे समय तक बीएनपी की प्रमुख रहीं और तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया।
पीएम मोदी ने जताया शोक, योगदान को बताया यादगार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन की खबर से उन्हें गहरा दुख हुआ है और इस कठिन समय में भारत बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने 2015 में ढाका में खालिदा जिया से हुई अपनी मुलाकात को भी याद किया और कहा कि उनकी सोच और विरासत दोनों देशों की साझेदारी को आगे दिशा देती रहेगी।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का संबोधन
खालिदा जिया के निधन के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि पूरा देश इस समय गहरे दुख में है। उन्होंने जनता से अपील की कि शोक की इस अवधि में धैर्य बनाए रखें और नमाज़-ए-जनाजा सहित सभी धार्मिक और आधिकारिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करें।
पूर्व प्रधानमंत्री का निधन ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। हाल ही में हिंसा, प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा, फरवरी में प्रस्तावित आम चुनावों की तैयारियां भी चल रही हैं और नामांकन प्रक्रिया जारी है। ऐसे में खालिदा जिया की अनुपस्थिति में यह देखना अहम होगा कि उनकी पार्टी बीएनपी राजनीतिक मजबूती बनाए रख पाती है या नहीं।