उदयपुर
राजस्थान में सरकारी विद्यालयों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालय भवनों का 100 प्रतिशत सुरक्षा ऑडिट आगामी 10 दिन में पूरा करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों (सीडीईओ) एवं समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों को स्पष्ट कहा कि सुरक्षा ऑडिट में ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। तय समय में ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा एवं आयुक्त, राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को भेजनी होगी। इसकी प्रति प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को भी देनी होगी।
शिक्षा विभाग ने यह कार्रवाई राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका में दिए गए निर्देशों की पालना में की है। विभाग ने कहा कि बिना सुरक्षा प्रमाण-पत्र (सेफ्टी सर्टिफिकेट) वाले किसी भी राजकीय विद्यालय भवन का उपयोग नहीं किया जाएगा। ऐसे में जिन स्कूल भवनों का अब तक सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ है, उन्हें प्राथमिकता से पीडब्ल्यूडी के जरिये जांच करवाकर सुरक्षा प्रमाण-पत्र जारी कराना होगा।
निर्देशों में केवल नियमित विद्यालय भवन ही नहीं, बल्कि वे भवन भी शामिल हैं जहां असुरक्षित घोषित स्कूलों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया गया है। इनमें अन्य सरकारी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र अथवा सार्वजनिक भवन शामिल हैं।
लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
निदेशालय ने कई जिलों से मिली शिकायतों का भी उल्लेख किया है, जिनमें अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, कनिष्ठ अभियंता एवं सहायक अभियंताओं की ओर से सुरक्षा ऑडिट कार्य में सहयोग नहीं देने की बात सामने आई है। ऐसे कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव राज्य स्तर पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जर्जर भवनों को ध्वस्त करें
शिक्षा विभाग ने उन विद्यालय भवनों पर भी ध्यान देने को कहा है, जिन्हें पूर्व में सर्वे या पुनः सर्वे के बाद पूरी तरह जर्जर घोषित किया जा चुका है। ऐसे भवनों को खाली कराकर शीघ्र ध्वस्त करने करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना, जनहानि या अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके लिए अभियंताओं के सहयोग से तत्काल प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
संभाग से लेकर जिला स्तर तक होगी मॉनिटरिंग
आदेश में संभागीय संयुक्त निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, समग्र शिक्षा के अधिकारियों और अभियंताओं को सुरक्षा ऑडिट की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा समयबद्ध रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी और प्रत्येक जिले की जवाबदेही तय होगी।