भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक (Custodian of Enemy Property for India – CEPI) ने इन संपत्तियों की विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि क्या सैफ अली खान और उनके परिवार के नियंत्रण वाली ये संपत्तियां ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) की श्रेणी में आती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच के दायरे में आई इन संपत्तियों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। शत्रु संपत्ति विभाग ने भोपाल जिला प्रशासन से नवाब कालीन संपत्तियों का पूरा ब्यौरा और संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।
क्या है शत्रु संपत्ति का विवाद?
यह पूरा मामला भोपाल नवाब के उत्तराधिकार और भारत-पाकिस्तान बंटवारे से जुड़ा है। नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान 1950 में पाकिस्तान चली गई थीं। शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत, जो लोग पाकिस्तान जाकर वहां की नागरिकता ले चुके हैं, उनकी भारत स्थित संपत्तियां ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित की जाती हैं और उन पर भारत सरकार का अधिकार होता है।
हालांकि, नवाब की दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान (सैफ अली खान की दादी) भारत में ही रहीं और उनका विवाह पटौदी परिवार में हुआ। सैफ अली खान और उनका परिवार इन्हीं के माध्यम से संपत्ति पर अपना हक जताता रहा है। अब विभाग यह जांच रहा है कि क्या बड़ी बेटी के पाकिस्तान जाने के कारण संपत्ति का कोई हिस्सा शत्रु संपत्ति माना जाना चाहिए या नहीं।
जांच की प्रक्रिया और प्रभाव
शत्रु संपत्ति कार्यालय (CEPI) ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कोहेफिजा, ईदगाह हिल्स, और शाही निवास सहित कई प्रमुख स्थानों की जानकारी मांगी है। अधिकारी यह जांचेंगे कि क्या इन जमीनों की बिक्री या हस्तांतरण में नियमों का उल्लंघन हुआ है। यदि जांच में यह साबित होता है कि ये संपत्तियां शत्रु संपत्ति के दायरे में आती हैं, तो इन्हें केंद्र सरकार अपने कब्जे में ले सकती है।
पुराना घटनाक्रम
यह पहली बार नहीं है जब नवाब की संपत्तियां विवादों में आई हैं। इससे पहले भी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) और वक्फ बोर्ड से जुड़े मामलों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जा चुकी है। सैफ अली खान, उनकी बहनें सोहा और सबा, तथा मां शर्मिला टैगोर इस जायदाद के प्रमुख दावेदार हैं। जबलपुर हाई कोर्ट में भी इससे जुड़े मामले पूर्व में विचाराधीन रहे हैं, जहां शत्रु संपत्ति विनियमन के तहत संपत्तियों के सत्यापन के मुद्दे उठाए गए थे।
फिलहाल जिला प्रशासन पुरानी फाइलों को खंगाल रहा है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट केंद्रीय कार्यालय को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही बॉलीवुड अभिनेता और उनके परिवार की पुश्तैनी जायदाद का भविष्य तय होगा।