संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद: मां रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई टली, बहू प्रिया पर संपत्ति हड़पने का आरोप

Delhi News : दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई टाल दी है। यह मामला हाई-प्रोफाइल सोना ग्रुप (Sona Group) की विरासत और संपत्ति विवाद से जुड़ा है।
अदालत अब इस मामले की सुनवाई 28 जनवरी को करेगी। रानी कपूर ने अपनी बहू प्रिया कपूर और अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
रानी कपूर ने अदालत से मांग की है कि कथित ‘फैमिली ट्रस्ट’ को अमान्य घोषित किया जाए। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना एक धोखाधड़ी वाला ट्रस्ट बनाया गया। इसके जरिए उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत को गैर-कानूनी तरीके से स्थानांतरित कर दिया गया।
इकलौती वारिस होने का दावा
कोर्ट में दाखिल अर्जी में रानी कपूर ने बताया कि वह अपने दिवंगत पति डॉ. सुरिंदर कपूर की इकलौती उत्तराधिकारी है। डॉ. कपूर सोना ग्रुप ऑफ कंपनियों के प्रमोटर थे, जिनका निधन जून 2015 में हुआ था। रानी कपूर के मुताबिक, उनके पति ने 6 फरवरी 2013 को एक वसीयत बनाई थी। इस वसीयत के तहत उनकी सारी संपत्ति पत्नी के नाम की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट से इस वसीयत को प्रोबेट (कानूनी मान्यता) भी मिल चुका है। उस समय उनके तीनों बच्चों ने इस पर अपनी सहमति भी दी थी। इसके बावजूद, बाद में चीजों को बदल दिया गया।
ईमेल हैक और कंपनी पर कब्जे का आरोप
रानी कपूर ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि साल 2017 के आसपास कुछ जटिल और अवैध लेन-देन किए गए। इसके जरिए उनकी संपत्ति को उस विवादित ट्रस्ट में डाल दिया गया। उन्होंने अपनी बहू प्रिया कपूर पर भी सीधा निशाना साधा है। आरोप है कि बेटे संजय कपूर की मौत के तुरंत बाद प्रिया ने उन्हें अंधेरे में रखा।
दावे के अनुसार, प्रिया कपूर ने बिना बताए सोना ग्रुप की कंपनियों में अहम पद संभाल लिए। रानी कपूर का कहना है कि उनसे कंपनी की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई। उन्हें बताया गया कि उनकी ईमेल आईडी हैक हो गई है। इसके बाद उनकी जानकारी के बिना एक नया ईमेल बनाया गया। इसी नए ईमेल के जरिए ट्रस्ट और कंपनी से जुड़े फैसले लिए गए।
रानी कपूर ने अब अदालत से गुहार लगाई है कि उनकी संपत्ति और विरासत उन्हें वापस सौंपी जाए। वह चाहती हैं कि स्थिति वैसी ही हो जाए, जैसी इस कथित ट्रस्ट के बनने से पहले थी।