मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक कारोबारी को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से कथित धमकी देकर 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगे जाने का मामला सामने आया है। कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक धमकी कॉल और मैसेज के जरिए दी गई, जिसमें रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही गई।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस और साइबर टीम ने तकनीकी जांच तेज कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी संगठित गिरोह से जुड़ा है या गैंग का नाम लेकर भय पैदा कर वसूली की कोशिश की गई है। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल, उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और संबंधित डिजिटल ट्रेल का मिलान कर रही हैं।
कारोबारी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस ने संपर्क के समय, भाषा, रकम की मांग और संभावित दबाव बनाने के तरीके जैसे बिंदुओं को केस फाइल में शामिल किया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में कई बार अपराधी गैंग का नाम इस्तेमाल कर फर्जी दबाव बनाते हैं, इसलिए सत्यापन के बाद ही नेटवर्क और साजिश की परतें स्पष्ट होती हैं।
शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया
पुलिस ने कारोबारी और परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाने शुरू किए हैं। साथ ही, शिकायतकर्ता के फोन रिकॉर्ड और प्राप्त संदेशों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि धमकी देने वालों को कारोबारी की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जानकारी कैसे मिली।
अधिकारियों के अनुसार, रंगदारी मांगने के मामलों में अपराधी अक्सर अलग-अलग राज्यों के नंबर, इंटरनेट कॉलिंग और फर्जी पहचान का उपयोग करते हैं। इसी वजह से तकनीकी और मैदानी जांच समानांतर चलती है। पुलिस ने संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है ताकि कॉल स्रोत और नेटवर्क की पुष्टि हो सके।
गैंग के नाम का इस्तेमाल, पुलिस सतर्क
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में बड़े गैंगों के नाम का उपयोग कर व्यापारियों, डॉक्टरों और ठेकेदारों को धमकाने की शिकायतें अलग-अलग इलाकों से आती रही हैं। ऐसे मामलों में अपराधी भय का माहौल बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर या नकद डिलीवरी का दबाव डालते हैं। सतना मामले में भी इसी एंगल से पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस ने व्यापारिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वॉयस नोट, सोशल मीडिया मैसेज या रंगदारी मांगने वाली बातचीत की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों में देर होने पर डिजिटल साक्ष्य कमजोर हो सकते हैं, इसलिए शुरुआती घंटों में शिकायत और डेटा साझा करना अहम होता है।
फिलहाल मामला जांच के चरण में है और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुष्टि होने के बाद ही आरोपियों की पहचान और नेटवर्क पर आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी। सतना में दर्ज इस शिकायत ने कारोबारी समुदाय में सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है, वहीं पुलिस का फोकस दबाव बनाने की कोशिश करने वाले लोगों तक जल्द पहुंचने पर है।