भारत के प्रतिष्ठित मूर्तिकार और पद्म भूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार का निधन हो गया है। वे 99 वर्ष के थे। राम सुतार ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सहित कई ऐतिहासिक स्मारकों को आकार दिया था। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
राम सुतार को उनकी बेमिसाल शिल्प कला के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपने लंबे करियर में 200 से अधिक स्मारकीय मूर्तियों का निर्माण किया। इनमें महात्मा गांधी की संसद भवन में स्थापित ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति से लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल की विशालकाय प्रतिमा तक शामिल हैं। उनकी कलाकृतियां न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी भारतीय शिल्प कौशल का लोहा मनवाती रही हैं।
साधारण शुरुआत से असाधारण सफर
राम वनजी सुतार का जन्म 1925 में महाराष्ट्र के एक बढ़ई परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें कला के प्रति गहरा रुझान था। उन्होंने सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से अपनी शिक्षा पूरी की। करियर की शुरुआत में उन्होंने अजंता और एलोरा की गुफाओं की मूर्तियों को पुनर्स्थापित करने का काम भी किया था। 1950 के दशक में वे दिल्ली आए और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ जुड़कर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: सबसे बड़ी उपलब्धि
राम सुतार के करियर का सबसे बड़ा मुकाम गुजरात के केवड़िया में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण रहा। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है और इसे दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होने का गौरव प्राप्त है। इस परियोजना के लिए उन्होंने सरदार पटेल के चेहरे और हाव-भाव को हूबहू उकेरने के लिए गहन शोध किया था।
सम्मान और पुरस्कार
कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। 1999 में उन्हें पद्म श्री और बाद में 2016 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें 2018 में टैगोर सांस्कृतिक सद्भावना पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
राम सुतार द्वारा बनाई गई महात्मा गांधी की प्रतिमाएं दुनिया भर के कई देशों में स्थापित हैं। फ्रांस, इटली, रूस और इंग्लैंड जैसे देशों में उनकी बनाई गांधी जी की मूर्तियां शांति का संदेश दे रही हैं। संसद भवन परिसर में स्थापित 16 फीट ऊंची महात्मा गांधी की प्रतिमा भी उन्हीं की देन है, जो देश के राजनीतिक विमर्श का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।
उनके निधन पर कला प्रेमियों और राजनीतिक जगत के दिग्गजों ने दुख व्यक्त किया है। राम सुतार का जाना भारतीय मूर्तिकला के एक युग का अंत माना जा रहा है।