मध्य प्रदेश के सीहोर में स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में एक बार फिर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने वाला है। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने आगामी शिव महापुराण कथा की तारीखों की घोषणा कर दी है। हालांकि, इस बार के आयोजन में एक बड़ा बदलाव किया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि इस बार कथा के दौरान रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन नहीं होगा, यानी रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा। यह निर्णय पिछली बार हुई अव्यवस्थाओं और भीड़ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
27 फरवरी से शुरू होगा महाआयोजन
कुबेरेश्वर धाम में आगामी 27 फरवरी से 5 मार्च तक शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस बार का आयोजन पूरी तरह से कथा श्रवण और शिव भक्ति पर केंद्रित रहेगा।
गौरतलब है कि पिछले साल रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान यहां लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी थी। अनियंत्रित भीड़ के कारण प्रशासन और आयोजन समिति को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। कई श्रद्धालु बीमार पड़ गए थे और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। इसी को देखते हुए समिति ने इस बार केवल कथा पर ही फोकस करने का फैसला किया है।
प्रदीप मिश्रा की श्रद्धालुओं से अपील
कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल शिव महापुराण का श्रवण करने के उद्देश्य से ही धाम पर आएं। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी श्रद्धालु रुद्राक्ष प्राप्ति की आशा लेकर न आए, क्योंकि वितरण का कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया है।
“इस बार रुद्राक्ष वितरण नहीं होगा। सभी भक्त केवल भगवान शिव की कथा सुनने और पुण्य लाभ लेने के लिए ही पधारें।” — पंडित प्रदीप मिश्रा
पिछली घटनाओं से लिया सबक
कुबेरेश्वर धाम में पिछले साल रुद्राक्ष वितरण के दौरान मची अफरा-तफरी बड़ी सुर्खियों में रही थी। उस समय अनुमान से कई गुना ज्यादा भीड़ जमा हो गई थी, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। हाईवे पर लंबा जाम लग गया था और पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। उस घटना से सबक लेते हुए, इस बार प्रशासन और समिति दोनों ही सतर्क हैं और पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन भी इस बार सुरक्षा और यातायात को लेकर विशेष योजना बना रहा है। चूंकि रुद्राक्ष वितरण नहीं है, इसलिए उम्मीद है कि भीड़ केवल कथा प्रेमियों की होगी, जिससे व्यवस्था बनाए रखना अपेक्षाकृत आसान होगा।