अवैध निर्माण मामले में डिप्टी कमिश्नर निलंबित, विधायक महेंद्र हार्डिया ने दी धरना की चेतावनी

शहर में अवैध निर्माण को लेकर उठे विवाद के बीच प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। शासन ने निगम के डिप्टी कमिश्नर शैलेश अवस्थी को निलंबित कर दिया है। इससे पहले निगम आयुक्त ने इसी प्रकरण में अधीक्षक और क्लर्क पर कार्रवाई की थी। मामला विधानसभा में उठे सवाल और उस पर दिए गए जवाब से जुड़ा बताया जा रहा है।

विधायक महेंद्र हार्डिया ने महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर, साईं कृपा, योजना 94 सहित कई क्षेत्रों में अवैध निर्माण का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उनके प्रश्न पर जो जवाब दिया गया, उसे भ्रामक बताया गया। इसी के बाद विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई और क्रमशः अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई सामने आई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगम आयुक्त ने एक दिन पहले अधीक्षक और क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद शासन स्तर से डिप्टी कमिश्नर शैलेश अवस्थी के निलंबन का निर्णय लिया गया। इस क्रम ने संकेत दिया है कि प्रकरण को केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि प्रशासनिक श्रृंखला में ऊपर तक जिम्मेदारी तय की जा रही है।

विधायक का आरोप: शिकायतों के बावजूद निर्माण जारी

विधायक महेंद्र हार्डिया का कहना है कि अवैध निर्माण का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं, लेकिन संबंधित क्षेत्रों में गतिविधियां रुकी नहीं हैं। उनके मुताबिक, कई स्थानों पर निर्माण कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने इसे स्थानीय स्तर की निगरानी और कार्रवाई पर गंभीर सवाल बताया है।

“मैं लगातार बोल रहा हूं, फिर भी अवैध निर्माण रुक नहीं रहे हैं। जरूरत पड़ी तो धरना देने से भी पीछे नहीं हटूंगा।” — महेंद्र हार्डिया

विधायक के इस बयान से साफ है कि मामला अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच जवाबदेही का विषय बन गया है। यदि निर्माण गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण नहीं हुआ तो राजनीतिक स्तर पर विरोध और तेज हो सकता है।

किन क्षेत्रों को लेकर उठे सवाल

विवाद जिन इलाकों को लेकर प्रमुख रूप से सामने आया है, उनमें महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर, साईं कृपा और योजना 94 शामिल हैं। विधायक ने इन क्षेत्रों का नाम लेकर विधानसभा में सवाल उठाया था। इसके बाद से फोकस इस बात पर है कि जमीनी स्तर पर किस प्रकार की जांच, रोकथाम और विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में दो बिंदु केंद्र में हैं। पहला, विधानसभा में दिए गए उत्तर की विश्वसनीयता। दूसरा, अवैध निर्माण पर वास्तविक नियंत्रण। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब नजर इस पर रहेगी कि संबंधित क्षेत्रों में मौके पर क्या बदलाव दिखता है और आगे किस स्तर तक जवाबदेही तय होती है।

फिलहाल, शासन द्वारा डिप्टी कमिश्नर के निलंबन और निगम आयुक्त की कार्रवाई ने यह प्रकरण गंभीर बना दिया है। दूसरी ओर, विधायक ने साफ संकेत दिया है कि यदि स्थिति जस की तस रही तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। आने वाले दिनों में यह मुद्दा नगर प्रशासन और स्थानीय राजनीति दोनों के लिए अहम बना रह सकता है।