Share Market: 3 दिन की तेजी थमी, सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा गिरा: BSE मार्केट कैप 466 लाख करोड़ पर

Share Market: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तीन दिनों की लगातार तेजी पर ब्रेक लग गया। शुरुआती बढ़त के बाद दोपहर के सत्र में बिकवाली तेज हुई और सेंसेक्स करीब 1,400 अंक टूटकर 82,825 के स्तर तक आ गया।
इसी दौरान निफ्टी 50 भी लगभग 400 अंक फिसलकर 25,400 के आसपास पहुंच गया। दिनभर की इस गिरावट ने निवेशकों का रुख सतर्क किया और बाजार की दिशा अचानक बदल गई।
बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 466 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया। कारोबार के दौरान आए इस दबाव से निवेशकों की संपत्ति में एक ही सत्र में करीब 5.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आंकी गई। इससे पहले लगातार तीन कारोबारी सत्रों में बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था, इसलिए यह गिरावट तेज मुनाफावसूली और हैवीवेट शेयरों में कमजोरी का संकेत मानी गई।
किन सेक्टरों और शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव रहा
गिरावट का असर सबसे ज्यादा बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में दिखा। हैवीवेट काउंटरों पर बिकवाली ज्यादा रही, जिससे इंडेक्स पर दबाव बढ़ता गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और लार्सन एंड टुब्रो में कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी लिमिटेड में भी नरमी रही।
आईटी सेक्टर से कुछ सहारा जरूर मिला। इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में हल्की बढ़त देखी गई, लेकिन यह समर्थन बाजार के व्यापक दबाव को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। व्यापक बाजार में भी कई शेयर लाल निशान में रहे, जिससे सेंटीमेंट और कमजोर हुआ।
वैश्विक संकेत, अस्थिरता और जोखिम से बचने की रणनीति
भारतीय बाजारों पर वैश्विक संकेतों का सीधा असर पड़ता है। इस समय निवेशक भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक वृद्धि दर और ब्याज दरों की भविष्य दिशा पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में जोखिम वाले एसेट, खासकर इक्विटी, से आंशिक निकासी बढ़ जाती है और निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और सरकारी बॉन्ड की ओर जाते हैं। इससे उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर दबाव बढ़ना सामान्य माना जाता है।
एशियाई बाजारों का रुख हालाकि पूरी तरह कमजोर नहीं था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ और जापान का निक्केई 225 लगभग 1 प्रतिशत चढ़ा। हांगकांग और चीन के बाजार चंद्र नववर्ष अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेश धारणा को कुछ समर्थन मिला।
कच्चा तेल और संस्थागत निवेशकों की चाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.37 प्रतिशत बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऊर्जा कीमतों में यह हलचल भी निवेशकों की निगरानी में रही, क्योंकि तेल की दिशा का असर महंगाई, कॉरपोरेट मार्जिन और विदेशी निवेश प्रवाह पर पड़ता है।
घरेलू आंकड़ों के मुताबिक, संस्थागत निवेशकों की गतिविधि सकारात्मक रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 440.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
आमतौर पर यह प्रवाह बाजार के लिए सहायक माना जाता है, लेकिन गुरुवार के सत्र में हैवीवेट शेयरों में आई तेज बिकवाली ने इस सहारे का प्रभाव सीमित कर दिया।
बाजार के लिए आगे क्या संकेत
मौजूदा सत्र ने यह संकेत दिया कि तेजी के बीच भी अस्थिरता बनी हुई है और बड़े शेयरों में छोटी अवधि की बिकवाली इंडेक्स को तेजी से नीचे ला सकती है। फिलहाल बाजार की चाल पर घरेलू आय, वैश्विक ब्याज दर संकेत, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का संयुक्त असर रहेगा।
निवेशकों की नजर अब अगले सत्रों में इस बात पर रहेगी कि क्या इंडेक्स प्रमुख सपोर्ट स्तरों पर टिक पाते हैं और क्या बैंकिंग व एफएमसीजी में फिर से स्थिरता लौटती है।