इंदौर शहर के यातायात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले शास्त्री ब्रिज को अब तोड़कर नए सिरे से बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। लगभग सात दशक पुराने इस रेल ओवरब्रिज की वर्तमान स्थिति, बढ़ते ट्रैफिक दबाव और सुरक्षा मानकों को देखते हुए इसे आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया गया है। इसी सिलसिले में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान इंदौर नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारतीय रेल के अधिकारी मौजूद रहे। सभी एजेंसियों ने मिलकर ब्रिज की वर्तमान संरचना, ट्रैफिक मूवमेंट, रेलवे ट्रैक की स्थिति और आसपास के शहरी विस्तार का जायजा लिया, ताकि नए ब्रिज की डिजाइन भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार की जा सके।
इससे पहले इस विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नए ब्रिज की योजना केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाले वर्षों के ट्रैफिक दबाव को ध्यान में रखकर तैयार की जाए। जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी राय देते हुए 6 लेन के चौड़े और मजबूत ब्रिज के निर्माण का सुझाव दिया था।
अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के बाद एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट में ब्रिज को तोड़ने की प्रक्रिया, नए ब्रिज की संभावित रूपरेखा, लागत, समयसीमा और निर्माण के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख होगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृतियां ली जाएंगी।
नया शास्त्री ब्रिज तैयार होने के बाद शहर के इस हिस्से में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। साथ ही यह ब्रिज इंदौर के शहरी ढांचे में एक आधुनिक और टिकाऊ अवसंरचना के रूप में जुड़ जाएगा, जो आने वाले दशकों तक शहर की यातायात जरूरतों को पूरा कर सकेगा।