भोपाल में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
दलहन मिशन का महत्व
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। फिर भी देश को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में दालों का आयात करना पड़ता है। इस स्थिति को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है।
इस मिशन के तहत किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही उन्हें बेहतर बीज और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी।
सम्मेलन में चर्चा के मुख्य बिंदु
भोपाल में आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा की गई। किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और समर्थन मूल्य पर भी बात हुई।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने मिलकर दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उपायों पर मंथन किया।
शिवराज सिंह चौहान की भूमिका
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की। उन्होंने दलहन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं। कृषि क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मिशन के लक्ष्य
राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। पहला लक्ष्य दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। दूसरा लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है।
मिशन के तहत नई तकनीकों का प्रसार किया जाएगा। उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा।
किसानों को मिलेगा लाभ
इस मिशन से देश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। दलहन की खेती करने वाले किसानों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्हें बाजार में उचित मूल्य दिलाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
सरकार किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान करेगी। आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी। इससे उत्पादकता में वृद्धि होगी।
आगे की राह
भोपाल सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को जल्द ही लागू किया जाएगा। राज्य सरकारों को भी इस मिशन में सहयोग करना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय से ही यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। किसानों की समृद्धि और देश की प्रगति दोनों सुनिश्चित होंगे।