सड़क पर घायल युवक को देख शिवराज सिंह चौहान ने रोका काफिला, अपनी कार से अस्पताल पहुंचाया, वीडियो हुआ वायरल

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल से ग्वालियर जाते समय सड़क किनारे घायल पड़े एक युवक को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। यह घटना भोपाल के किलोल पार्क के पास हुई। जानकारी के अनुसार युवक अचेत अवस्था में था और आसपास भीड़ मौजूद थी। चौहान ने स्थिति देखते ही काफिला रुकवाया, वाहन से उतरकर युवक तक पहुंचे और उसे अपनी गाड़ी से नजदीकी अस्पताल भिजवाया।

घटना के बाद यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सामने आया। पहले उनके कार्यालय के आधिकारिक हैंडल ने 27 फरवरी 2026 को वीडियो साझा किया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने 28 फरवरी 2026 को अपनी ओर से वीडियो पोस्ट किया और सड़क हादसों में समय पर मदद की जरूरत पर जोर दिया।

किलोल पार्क के पास रुका काफिला

मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक युवक गंभीर रूप से घायल था। कई लोग आसपास खड़े थे, लेकिन कोई उसे अस्पताल ले जाने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा था। चौहान ने इसे देखते ही तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने पहले घायल की स्थिति देखी, फिर देर किए बिना उसे वाहन में बैठाकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

इस दौरान उनके साथ मौजूद स्टाफ और स्थानीय लोगों ने भी रास्ता खाली कराने में सहयोग किया। प्राथमिकता केवल एक थी, घायल को जल्दी से जल्दी इलाज मिले। अस्पताल पहुंचने के बाद चौहान ने डॉक्टरों से बात की और तत्काल उपचार शुरू करने को कहा। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचने से मरीज की स्थिति नियंत्रित की जा सकी।

X पर साझा किया घटनाक्रम

चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि वे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे। रास्ते में घायल युवक को अचेत अवस्था में देखकर उन्होंने गाड़ी रुकवाई। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर भीड़ केवल देखती रहती है और मदद देर से मिलती है, जिससे घायल की हालत और बिगड़ती है।

“मैं भोपाल से ग्वालियर की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था। रास्ते में सड़क किनारे एक घायल युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया। चारों ओर भीड़ थी, लोग खड़े थे, देख रहे थे; पर कोई आगे नहीं बढ़ रहा था। मैंने तुरंत गाड़ी रुकवाई।” — शिवराज सिंह चौहान

अपने संदेश में उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरुआती समय को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में लोग हादसों में जान गंवाते हैं। अगर पीड़ित को गोल्डन ऑवर में उपचार मिल जाए तो लगभग 50 प्रतिशत जीवन बचाए जा सकते हैं। यह बात उन्होंने नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ी और हर व्यक्ति को आपात स्थिति में सक्रिय होने की सलाह दी।

“सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है, जबकि यदि पीड़ित को गोल्डन ऑवर में उपचार मिल जाए, तो लगभग 50% जीवन बचाए जा सकते हैं।” — शिवराज सिंह चौहान

‘तमाशबीन न बनें’ संदेश का मुख्य बिंदु

चौहान ने कहा कि दुर्घटना स्थल पर मौजूद लोगों का पहला काम राहत पहुंचाना होना चाहिए। उनका कहना था कि कई बार पुलिस, एम्बुलेंस या परिजन के इंतजार में अहम समय निकल जाता है। ऐसे में पास मौजूद व्यक्ति अगर तुरंत कदम उठाए, तो अस्पताल तक पहुंचने में होने वाली देरी कम की जा सकती है। इसी देरी को कम करना जीवन रक्षक साबित होता है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी घायल को देखकर कानूनी झंझट के डर से पीछे न हटें। जरूरत पड़ने पर नजदीकी अस्पताल पहुंचाने, एम्बुलेंस कॉल करने और प्राथमिक सूचना देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है और सेवा ही सच्चा धर्म है।

घटना का सार्वजनिक महत्व

यह घटना इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि इसमें एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति ने मौके पर रुककर तत्काल मदद की। सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में संदेश साफ रहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्घटना के बाद नागरिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही अहम है। समय पर उठाया गया एक कदम, एक परिवार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

मौजूदा मामले में भी यही बात सामने आई कि घायल को देरी के बिना अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार त्वरित चिकित्सा शुरू होना स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण रहा। चौहान ने अंत में लोगों से कहा कि ऐसी परिस्थिति दिखे तो आगे बढ़ें, क्योंकि आपकी एक मदद किसी की जान बचा सकती है।