Silver-Gold Closing Price : बुधवार 29 जनवरी को सोना और चांदी दोनों लगातार चौथे दिन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,76,121 पर खुला और ₹10,705 की बढ़त के साथ ₹1,75,340 पर बंद हुआ। मंगलवार को यह ₹1,64,635 पर था।
चांदी में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। एक किलो चांदी ₹21,721 महंगी होकर ₹3,79,988 पर पहुंच गई। शुक्रवार को चांदी ₹3,17,705 प्रति किलो थी। पिछले चार कारोबारी दिनों में सोना ₹21,030 और चांदी ₹62,283 महंगी हो चुकी है।
जनवरी में सोना ₹42 हजार और चांदी ₹1.5 लाख महंगी
इस साल जनवरी महीने में ही कीमती धातुओं में भारी उछाल आया है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना ₹1,33,195 था, जो अब ₹1,75,340 हो गया है। यानी महज 29 दिनों में ₹42,145 की तेजी आई है।
चांदी की स्थिति और भी दिलचस्प है। साल के अंत में यह ₹2,30,420 प्रति किलो थी, जो अब ₹3,79,988 पर पहुंच गई है। एक महीने में ₹1,49,568 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शहरों में अलग दाम क्यों
IBJA की कीमतों में 3 फीसदी जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग होते हैं। RBI इन्हीं रेट्स के आधार पर सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमतें तय करता है। कई बैंक गोल्ड लोन के लिए भी इन दरों का इस्तेमाल करते हैं।
सोने में तेजी के तीन बड़े कारण
ग्लोबल टेंशन और ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। ट्रेड वॉर के खतरे के दौरान निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश यानी सोने में लगाते हैं।
रुपए की रिकॉर्ड कमजोरी: भारत में सोने की कीमत वैश्विक दरों के साथ-साथ डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती है। आज रुपया डॉलर के मुकाबले ₹91.10 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया। LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, रुपए की कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदे जाने वाले सोने की लैंडिंग कॉस्ट भारत में बहुत बढ़ गई है।
सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी: दुनियाभर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद 2026 की शुरुआत में भी सेंट्रल बैंकों की मांग मजबूत बनी हुई है। सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा होने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
चांदी में उछाल के प्रमुख कारण
इंडस्ट्रियल डिमांड में बढ़ोतरी: सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल में चांदी का भारी इस्तेमाल हो रहा है। अब यह सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि जरूरी कच्चा माल बन गई है।
ट्रंप का टैरिफ डर: अमेरिकी कंपनियां संभावित टैरिफ के डर से चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। इससे ग्लोबल सप्लाई में कमी आई है और कीमतें ऊपर चढ़ी हैं।
मैन्युफैक्चरर्स की होड़: प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी मैन्युफैक्चरर्स पहले से खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी चांदी में तेजी बनी रहने की संभावना है।