Mumbai News : महाराष्ट्र में आज, 15 जनवरी 2026 को हो रहे नगर निगम चुनावों के कारण भारतीय शेयर बाजार (NSE और BSE) में सन्नाटा पसरा है। एक्सचेंजों द्वारा घोषित इस पूर्ण अवकाश ने न केवल निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज हाउस ‘जिरोधा’ के को-फाउंडर नितिन कामथ ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
सेटलमेंट से ट्रेडिंग हॉलिडे तक का सफर
शुरुआत में शेयर एक्सचेंजों ने 15 जनवरी को केवल ‘सेटलमेंट हॉलिडे’ घोषित किया था। इसका अर्थ यह था कि ट्रेडिंग तो जारी रहती, लेकिन शेयरों और पैसों का हस्तांतरण (Settlement) अगले दिन होता।
हालाकि, अंतिम समय में सर्कुलर बदलकर इसे ‘ट्रेडिंग हॉलिडे’ कर दिया गया। एक्सचेंजों का तर्क है कि चूंकि राज्य में बैंक बंद हैं, इसलिए फंड ट्रांसफर में समस्या आ सकती थी, जिसके चलते बाजार को पूरी तरह बंद करना पड़ा।
नितिन कामथ की आलोचना: “ग्लोबल इमेज पर पड़ता है असर”
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे खराब प्लानिंग का उदाहरण बताया। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
स्थानीय बनाम वैश्विक: कामथ के अनुसार, किसी शहर या राज्य के निकाय चुनाव के लिए पूरे देश के शेयर बाजार को बंद करना तर्कसंगत नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय छवि: भारतीय बाजार अब वैश्विक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा है। बार-बार होने वाली ऐसी छुट्टियां अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
पुरानी व्यवस्था का मोह: उन्होंने दिग्गज निवेशक चार्ली मंगर के मशहूर कथन—“मुझे इंसेंटिव दिखाओ और मैं तुम्हें आउटकम दिखा दूंगा”—का हवाला देते हुए कहा कि सिस्टम में कोई भी इस पुरानी परिपाटी को बदलना नहीं चाहता क्योंकि इसमें बदलाव का कोई बड़ा ‘इंसेंटिव’ नहीं दिखता।
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय और चुनौती
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, तब उसे ग्लोबल स्टैंडर्ड अपनाने होंगे। बार-बार होने वाले अवकाशों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को अपनी पोजीशन ‘हेज’ (Hedge) करने में कठिनाई होती है।
दूसरी ओर, सरकार और सेबी का रुख यह है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी के लिए कर्मचारियों और वोटर्स को अवकाश देना अनिवार्य है।
MCX और अन्य खंडों की स्थिति
भले ही इक्विटी मार्केट (Cash Segment) पूरी तरह बंद है, लेकिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शाम के सत्र में कामकाज होगा।
सुबह का सत्र: वोटिंग के कारण बंद।
शाम का सत्र: शाम 5 बजे से सोना, चांदी और अन्य कमोडिटीज में ट्रेडिंग शुरू होगी।
एग्री-कमोडिटीज: कुछ कृषि उत्पादों में रात 9 बजे तक ट्रेडिंग की अनुमति दी गई है।
क्या होता है ‘सेटलमेंट हॉलिडे’?
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ‘ट्रेडिंग हॉलिडे’ और ‘सेटलमेंट हॉलिडे’ में क्या अंतर है।
ट्रेडिंग हॉलिडे: इस दिन आप कोई शेयर खरीद या बेच नहीं सकते।
सेटलमेंट हॉलिडे: इस दिन आप ट्रेडिंग तो कर सकते हैं, लेकिन आपके द्वारा बेचे गए शेयरों का पैसा या खरीदे गए शेयर डीमैट खाते में आने की प्रक्रिया एक दिन के लिए रुक जाती है।
निष्कर्ष: महाराष्ट्र के निकाय चुनावों ने भारतीय वित्तीय बाजारों के परिचालन और भविष्य की नीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।