इंदौर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त एक्शन! धन्नड़ में सील किए गए कार्यालय

इंदौर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई जारी है। सोमवार को अपर कलेक्टर गौरव बेनल ने ग्राम धन्नड़ स्थित अवैध कॉलोनी ‘प्रतीक विहार’ के कार्यालयों को सील कर दिया। इस कॉलोनी को रमीज खान नाम के व्यक्ति द्वारा डेवलप किया जा रहा था, जिसके खिलाफ अब कार्रवाई की जा रही है।

अवैध कॉलोनी की शिकायत पर जांच और कार्रवाई

एसडीएम राऊ, गोपाल सिंह वर्मा ने बताया कि ग्राम धन्नड़ के खसरा नंबर 1061 और 1058/5 पर अवैध निर्माण के बारे में शिकायत मिली थी। खसरा नंबर 1061 अरुण सिसोदिया और 1058/5 ईश्वर सिसोदिया के नाम से रजिस्टर्ड था, और दोनों स्थान कृषि भूमि के रूप में दर्ज थे। जांच के दौरान खसरा नंबर 1061 पर पक्की सड़कों और 70 निर्माणाधीन मकानों सहित अन्य विकास कार्य पाए गए। खसरा नंबर 1058/5 पर कोई निर्माण नहीं था।

एसडीएम ने इस मामले में अरुण सिसोदिया को फोन करके मामले में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे, लेकिन असमर्थता जताने पर उसे 1 अप्रैल को एसडीएम के समक्ष दस्तावेजों सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।

अवैध कॉलोनी के कार्यालयों को किया सील

इस जांच के दौरान, खसरा नंबर 1061 पर कॉलोनी के निर्माण कार्य के लिए लोहे से बने दो ताले बंद ऑफिस पाए गए, जिनका उद्देश्य प्लॉट और रो हाउस की बिक्री था। हालांकि, मौके पर कोई भी कर्मचारी नहीं मिला, और इन कार्यालयों को तुरंत सील कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रशासन द्वारा अवैध कॉलोनी के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है।

वाहनों के खिलाफ कार्रवाई 

इंदौर में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा लोक परिवहन वाहनों की लगातार चेकिंग की जा रही है। सोमवार को इंदौर-पीथमपुर इंडो रामा रूट पर बसों की सघन चेकिंग की गई। इस दौरान कई बसों में दस्तावेजों की कमी, क्षमता से अधिक सवारी और परमिट शर्तों का उल्लंघन पाया गया। इसके अलावा, स्कूल वाहनों में भी विभिन्न कमियां सामने आईं।

16 वाहनों से 7 लाख 50 हजार का जुर्माना वसूला

इस चेकिंग के दौरान, आरटीओ के अमले ने 16 वाहनों पर जुर्माना लगाया और कुल 7 लाख 50 हजार रुपए से अधिक की वसूली की। इसके अलावा, एक यात्री बस और एक ट्रक को बिना फिटनेस के संचालित होने के कारण जब्त कर लिया गया।

एचएसआरपी नंबर प्लेट और अन्य दस्तावेजों की चेकिंग

इस अभियान के दौरान, आरटीओ टीम ने वाहनों के फिटनेस, परमिट, बीमा, पीयूसी और कर प्रमाण पत्र की जांच की। साथ ही, बसों में ओवरलोडिंग, अधिक किराया और वाहनों की गति (स्पीड गवर्नर) की भी जांच की गई। साथ ही, लोगों को अपने वाहनों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगवाने के लिए प्रेरित किया गया।