सुप्रीम कोर्ट ने ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर याचिका खारिज की: 27 फरवरी को रिलीज़ तय

फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए इसे खारिज कर दिया। याचिका में फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई गई थी और कहा गया था कि इससे एक जाति को गलत तरीके से दिखाए जाने की आशंका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध सामग्री में ऐसा कोई आधार नहीं दिखता, जिससे शीर्षक को जाति-विशेष का अपमान माना जाए।
मामले की सुनवाई जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने की। बेंच ने कहा कि उसने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखी है और प्रथम दृष्टया फिल्म का शीर्षक यादव समुदाय का नकारात्मक चित्रण नहीं करता। अदालत ने यह भी कहा कि केवल आशंका के आधार पर किसी फिल्म के शीर्षक को असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति को शीर्षक-केंद्रित बताया। बेंच की ओर से कहा गया कि शीर्षक में कहीं भी ऐसी बात नहीं है, जिससे किसी जाति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया हो। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि फिल्म की कहानी काल्पनिक बताई जा रही है और इस आधार पर अत्यधिक विरोध उचित नहीं है।

“हमने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखा। हमें ऐसा नहीं लगता कि फिल्म का शीर्षक यादव समुदाय का गलत या नकारात्मक तरीके से दिखाता या उसे अपमानित करता है।” — सुप्रीम कोर्ट की बेंच

जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई में ‘घूसखोर पंडत’ मामले का जिक्र करते हुए अंतर भी बताया। अदालत के मुताबिक वह मामला अलग था, क्योंकि वहां एक जाति के लोगों को भ्रष्ट बताने का स्पष्ट आभास बन रहा था। मौजूदा मामले में ऐसी स्थिति रिकॉर्ड से सामने नहीं आई।

“आपकी मुख्य आपत्ति फिल्म के टाइटल को लेकर है, लेकिन इसमें कहीं भी किसी जाति को गलत तरीके से नहीं बताया गया है। यह मामला ‘घूसखोर पंडत’ से अलग है।” — जस्टिस बी वी नागरत्ना

याचिकाकर्ता की दलील और रिलीज डेट
याचिकाकर्ता अवधेश यादव की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होनी है। उन्होंने कोर्ट से यह अनुमति देने का अनुरोध किया कि रिलीज के बाद फिल्म देखने पर यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री मिले तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकें।
इस पर बेंच ने दोहराया कि फिल्म की कहानी काल्पनिक बताई गई है और केवल आशंकाओं के आधार पर रोक या असंवैधानिकता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए शीर्षक के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
इस आदेश के बाद फिलहाल फिल्म की निर्धारित रिलीज पर कोई न्यायिक रोक नहीं है। अदालत के रुख से यह स्पष्ट हुआ कि अभिव्यक्ति, रचनात्मक सामग्री और शीर्षक से जुड़े विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप के लिए ठोस और प्रत्यक्ष सामग्री जरूरी है, मात्र संभावित आपत्ति पर्याप्त नहीं मानी जाएगी।