इंदौर SHO इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट ने पद से हटाया, सैकड़ों केस में एक ही गवाह बनाने पर की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली/इंदौर: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए इंदौर के चंदन नगर पुलिस स्टेशन के प्रभारी (SHO) इंद्रमणि पटेल को तत्काल सभी पुलिस कर्तव्यों से हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने सैकड़ों अलग-अलग आपराधिक मामलों में बार-बार एक ही व्यक्ति को गवाह के रूप में पेश करने की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता और नाराजगी व्यक्त की।

यह मामला तब सामने आया जब अदालत एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह पाया गया कि कई केसों में गवाहों के नाम और बयान लगभग एक जैसे थे। इस पैटर्न ने न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद अदालत ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया।

अदालत की तीखी फटकार

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने एसएचओ पटेल के आचरण को बेहद आपत्तिजनक पाया। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह अधिकारी एक दुष्ट अधिकारी है।” अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की प्रथाएं न्याय प्रणाली के साथ एक धोखा हैं और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने इंदौर के पुलिस कमिश्नर को भी चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन तुरंत नहीं किया गया तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंद्रमणि पटेल को जांच या पुलिस से जुड़े किसी भी काम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

क्या है ‘स्टॉक विटनेस’ का मामला?

पुलिस की कार्यवाही में ‘स्टॉक विटनेस’ या ‘पेशेवर गवाह’ उन लोगों को कहा जाता है, जिन्हें पुलिस विभिन्न मामलों में गवाही देने के लिए बार-बार इस्तेमाल करती है। अक्सर ऐसे गवाह पुलिस के प्रभाव में होते हैं और उनके बयान पूर्व-नियोजित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह प्रथा न केवल अनैतिक है, बल्कि यह निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का एक जरिया भी बन सकती है।

इस आदेश ने इंदौर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उम्मीद है कि इस मामले के बाद पुलिस विभाग अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे।