नई दिल्ली/भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार, जो बिना किसी रियायत का लाभ उठाए सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं, उन्हें ओपन (खुली) कैटेगरी के पदों पर नियुक्ति पाने का पूरा अधिकार है।
इस फैसले ने मेरिट को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह स्थापित किया है कि सामान्य श्रेणी किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए समान रूप से खुली है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखते हुए यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी। यह मामला राजस्थान में वर्ष 2022 की एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें आरक्षित वर्ग के कुछ उम्मीदवारों को सामान्य कट-ऑफ से ज़्यादा अंक लाने के बावजूद केवल उनकी आरक्षित श्रेणी तक ही सीमित कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर सफल उम्मीदवार को ओपन कैटेगरी से वंचित करना संविधान की समानता और न्याय की मूल भावना के विरुद्ध है।
मध्य प्रदेश में लागू करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश में इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार से अपील की है कि इस निर्णय के पालन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के माध्यम से एक स्थायी आदेश जारी किया जाए। संगठनों ने मांग की है कि इस आदेश को राजपत्र में भी प्रकाशित किया जाए, ताकि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर किसी भी तरह का भ्रम या भेदभाव न हो।
‘मेरिट की जीत’, संगठनों ने किया स्वागत
इस ऐतिहासिक निर्णय का प्रदेश के सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने व्यापक स्वागत किया है। इसे ‘मेरिट की जीत’ बताते हुए पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा के संरक्षक इंजीनियर भुवनेश कुमार पटेल, पूर्व महापौर श्रीमती विभा पटेल, पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद के महामंत्री सी. एस. यादव और अपाक्स के प्रांताध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह यादव ने कहा कि यह फैसला योग्य युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा।
“यह फैसला आरक्षित वर्ग के मेधावी युवाओं को आगे बढ़ने का समान अवसर देगा और भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसंगत बनाएगा।” — विभिन्न सामाजिक एवं कर्मचारी संगठन