सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 1 फरवरी को ही पेश होगा आम बजट, विपक्ष की ‘तारीख बदलने’ वाली मांग खारिज

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के बीच आम बजट की तारीख को लेकर चल रहा राजनीतिक गतिरोध अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें चुनावों के मद्देनजर बजट की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब केंद्र सरकार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 फरवरी को ही देश का आम बजट पेश करेगी।

विपक्ष की दलील: ‘लोक-लुभावन’ घोषणाओं का डर

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने बजट की तारीख का कड़ा विरोध किया था। विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद यदि केंद्र सरकार बजट पेश करती है, तो वह लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा कर मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने इस मुद्दे पर कहा था कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि बजट को 8 मार्च (मतदान प्रक्रिया पूरी होने) के बाद पेश किया जाए। विपक्षी दलों ने इस मामले में पहले चुनाव आयोग और फिर राष्ट्रपति से भी मुलाकात की थी, लेकिन अंततः मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुँचा।

शिवसेना का ‘बगावती’ सुर

दिलचस्प बात यह रही कि केंद्र में भाजपा की सहयोगी रही शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष का साथ दिया। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रपति से अपने विशेषाधिकार का उपयोग करने की अपील की थी। उनका तर्क था कि बजट में नई योजनाओं की घोषणा से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा और सत्ताधारी दल को चुनावों में अनुचित लाभ मिल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और सरकार की राहत

विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बजट एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे चुनाव के आधार पर टाला नहीं जा सकता। न्यायालय के इस फैसले से केंद्र की मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है। सरकार का तर्क रहा है कि बजट को समय पर पेश करना देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय योजना के लिए अनिवार्य है, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत से ही योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू हो सके।

बजट और चुनाव का टकराव

उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले इन चुनावों को ‘मिनी जनमत संग्रह’ माना जा रहा है। ऐसे में बजट की तारीख को लेकर मचे सियासी घमासान ने काफी सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, अब न्यायिक हस्तक्षेप के बाद यह साफ हो गया है कि संसद की कार्यवाही अपने तय समय पर चलेगी।