प्रखर – वाणी
खरगे जी आप जो कह रहे हो वो आपके दल की मानसिकता है…वर्षों तक जिस वोट बैंक की खातिर कांग्रेस कार्य करती रही वो किसकी विपन्नता है…शाहबानों के प्रकरण पर न्यायालय का फैसला बदलने वाले किस गरीबी की बात कर रहे हैं…गरीबी हटाओ का नारा देकर गरीब हटाने वाले किस बेकारी की बात कर रहे हैं…गंगा में डुबकी लगाना हमारी आस्थाओं का हिस्सा है…श्रद्धा से जुड़ा महाकुंभ न कहानी है न किस्सा है…हमारी सनातन संस्कृति में हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु हमने प्राणों की बाजी लगा दी…छत्रपति सम्राट ने हिन्दू पदपादशाही की स्थापना हेतु अफ़जल खान की फौज भगा दी…
हमारे लिए जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण आस्थावान पर्व महाकुंभ है…जिन बयानों से आहत हुए हम उनके सीने में बसे शुम्भ – निशुम्भ है…यूँ ही करोड़ों लोगों का हुजूम पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगाने नहीं आ रहा…तुमको उनके विश्वास का पैमाना भारी सता रहा…गरीबी और बेरोजगारी को आस्थाओं से मत जोड़ो…हमारी श्रद्धा के विराट महल को अपने नापाक इरादों से मत तोड़ो…हम घास की रोटी खा लेंगे मगर सनातनी परम्पराओं पर समझौता नहीं करेंगे…हमारे धर्म पर जो करेगा करारी चोंट तो हम उसके रक्षार्थ जिएंगे नहीं मरेंगे…तुमने सोये हुए सांप को छेड़ा है…गंगा मैया पर टिप्पणी कर खड़ा कर दिया बखेड़ा है…
हम आस्थाओं को दौलत की दुमदुभी से नहीं जोड़ते…किसी का ठीकरा किसी और के माथे नहीं फोड़ते…ये बयान तो औरंगजेब की मानसिकता से भी बदतर है…कुछ मामलों में तो लगता है कि पप्पू भी तुमसे बेहतर है…करोड़ों के जनसैलाब को तुम्हारी दो कौड़ी का बयान रोक नहीं सकता…तुम्हारे दल का क्या कोई मायकेलाल तुमको टोक नहीं सकता…पैंतालीस करोड़ लोग देश – विदेश से गंगा में डुबकी लगाने का इरादा रखकर आने वाले हैं…क्या उनके विरुद्ध कसोटते इस बयान पर तुम्हारे साथियों के मुख पर ताले हैं…यदि हम धर्म की रक्षा हेतु अर्थविहीन हुए तो हमें गर्व हैं कि हम गरीब हैं…यदि हम आस्थाओं की प्रतिपूर्ति हेतु रोजगार नहीं पा सके तो हमें गर्व है कि हम बेरोजगार हैं…
हम रेती फांककर जी लेंगे लेकिन अपनी श्रद्धा को चुनौती बर्दाश्त नहीं करेंगे…तन पर कम कपड़े पहनकर ठंड भगा लेंगे मगर सनातन का बिछोह बर्दाश्त नहीं करेंगे…बार बार बिचकती जिव्हा को रोको अपनी जुबान पर लगाम दो…अपना व अपने दल का भला चाहते हो तो सनातन की रक्षा का पैगाम दो..