सरकार जल्द ही लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिनका उद्देश्य तंबाकू, पान मसाला और अन्य सिन गुड्स पर टैक्स का बोझ वर्तमान स्तर पर बनाए रखना है। GST कंपनसेशन सेस 2026 के बाद खत्म होने वाला है, ऐसे में सरकार नई लेवी लागू करके इन उत्पादों पर टैक्स व्यवस्था को जारी रखना चाहती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल, 2025 और हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 पेश करेंगी।
तंबाकू और पान मसाला पर लगेगा नया टैक्स सिस्टम
सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल, 2025 का उद्देश्य तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाकर मौजूदा GST कंपनसेशन सेस की जगह लेना है। वहीं हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 पान मसाला जैसे उत्पादों पर लागू होगा और इसी के माध्यम से सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों के लिए राजस्व जुटाएगी। यह सेस उन मशीनों या प्रक्रियाओं पर लगेगा जिनसे इन विशेष उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।
वर्तमान टैक्स संरचना: कितना लगता है टैक्स?
फिलहाल तंबाकू और पान मसाला पर 28% GST लगाया जाता है। इसके अलावा, इन पर अलग-अलग दरों पर कंपनसेशन सेस भी वसूला जाता है। जब 2017 में GST लागू हुआ था, तब राज्यों के रेवेन्यू घाटे की भरपाई के लिए 30 जून 2022 तक के लिए कंपनसेशन सेस शुरू किया गया था। बाद में इस अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया गया, ताकि कोविड के दौरान लिए गए लोन की अदायगी पूरी की जा सके।
अब जब केंद्र सरकार जल्द ही यह लोन चुकाने वाली है, कंपनसेशन सेस को समाप्त कर दिया जाएगा। ऐसे में नई टैक्स लेवी उसी प्रभाव को बनाए रखेगी जो अभी कंपनसेशन सेस के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है।
GST काउंसिल के फैसलों का संदर्भ
3 सितंबर 2025 की GST काउंसिल बैठक में निर्णय हुआ था कि तंबाकू और पान मसाला पर कंपनसेशन सेस तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित ऋण का भुगतान पूरा नहीं हो जाता। अन्य महंगी वस्तुओं से सेस पहले ही समाप्त कर दिया गया है और अब वे 5% तथा 18% के स्लैब में टैक्स अदा कर रहे हैं। अत्यधिक महंगी वस्तुओं व एरेटेड ड्रिंक्स पर 40% का नया रेट लागू है।
क्यों जरूरी हैं ये नए बिल?
सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल, 2025 और हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 यह सुनिश्चित करेंगे कि:
- कंपनसेशन सेस बंद होने के बाद भी
तंबाकू और पान मसाला पर टैक्स का बोझ कम न हो - सिन गुड्स के उपभोग को नियंत्रित रखने के लिए
टैक्स संरचना मजबूत और प्रभावी बनी रहे - सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में
राजस्व का स्थिर स्रोत उपलब्ध हो
इन संशोधनों के बाद संभावना है कि तंबाकू व पान मसाला जैसी चीजें और महंगी हो जाएँ, ताकि इनके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके और सरकार को आवश्यक फंडिंग मिल सके।