ई-अटेंडेंस के विरोध में शिक्षक सड़कों पर उतरेंगे: वेतन रोकने का आरोप, 18 जनवरी को भोपाल में बड़ा आंदोलन

मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि डिजिटल उपस्थिति की प्रक्रिया में गंभीर तकनीकी और निजता से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी के विरोध में प्रदेशभर के शिक्षकों ने 18 जनवरी को राजधानी भोपाल में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक 18 जनवरी को अंबेडकर पार्क, भोपाल में एकत्र होकर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे उपस्थिति दर्ज कराने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन व्यक्तिगत मोबाइल फोन और निजी इंटरनेट डेटा के उपयोग को अनिवार्य किए जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आदेश मानसिक और तकनीकी रूप से प्रताड़नापूर्ण है।

शिक्षक नेताओं का आरोप है कि ई-अटेंडेंस ऐप में कई तकनीकी खामियां हैं, जिनके कारण समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या आम है, वहीं कई बार ऐप लॉगिन ही नहीं होता। इसके बावजूद विभाग द्वारा उपस्थिति न होने के आधार पर शिक्षकों का वेतन रोका जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।

मध्य प्रदेश के शिक्षक नेता सतेन्द्र सिंह तिवारी ने प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे 18 जनवरी को बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि आंदोलन के समापन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें ई-अटेंडेंस ऐप की तकनीकी विसंगतियों को तत्काल दूर करने की मांग की जाएगी।

शिक्षकों का यह भी कहना है कि ई-अटेंडेंस ऐप के जरिए उनका संवेदनशील निजी डेटा जैसे चेहरा, बैंक खाता विवरण, समग्र आईडी और माता-पिता से जुड़ी जानकारी ली जा रही है। इससे डेटा लीक होने और दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। शिक्षकों ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।

इसके अलावा ऐप में 24 घंटे लोकेशन ऑन रखने की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि इससे न केवल उनकी निजी स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि यह उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि ड्यूटी समय के बाहर उनकी गतिविधियों पर निगरानी क्यों रखी जा रही है।

शिक्षकों का दावा है कि नवंबर माह से ही हजारों शिक्षकों का वेतन सिर्फ इस कारण रोक दिया गया है कि ऐप में उनकी हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी। जबकि वास्तविकता यह है कि वे स्कूल में नियमित रूप से उपस्थित थे, लेकिन नेटवर्क फेल या तकनीकी खराबी के कारण उपस्थिति अपडेट नहीं हो पाई।

कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं हुई हैं। इससे शिक्षकों में डर और असुरक्षा का माहौल है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तकनीकी जानकारी और संसाधन सीमित हैं।

शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत मोबाइल ऐप की जगह स्कूल परिसरों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जाएं, ताकि उपस्थिति पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से दर्ज हो सके। इसके साथ ही तकनीकी कारणों से रोके गए वेतन को तुरंत जारी किया जाए और मैनुअल रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति को ही वेतन का आधार माना जाए।

कुल मिलाकर, ई-अटेंडेंस को लेकर उठ रहा यह विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी व्यापक किया जाएगा।