उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर जारी विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करने जा रहा है।
याचिका में मुख्य रूप से इस बात पर आपत्ति जताई गई है कि जब प्रभावशाली व्यक्तियों, नेताओं और वीआईपी को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है, तो आम भक्तों को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा गया है।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिलाने के उद्देश्य से इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने एडवोकेट विष्णु जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की है। कानूनी गलियारों में इस याचिका को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर धार्मिक समानता और मंदिर प्रबंधन के नियमों को चुनौती देती है।
जानकारी के अनुसार, इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें मंदिर समिति के विवेकाधिकार और श्रद्धालुओं के मौलिक अधिकारों पर बहस हो सकती है।
धार्मिक अधिकारों और समानता का उठाया गया मुद्दा
दायर याचिका में दलील दी गई है कि देश और विदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन की अभिलाषा लेकर उज्जैन पहुंचते हैं। लेकिन वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन कर संतोष करना पड़ता है।
दूसरी ओर, सत्ता और रसूख से जुड़े लोग बिना किसी रोक-टोक के गर्भगृह के भीतर जाकर पूजा-अर्चना और अभिषेक कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों के भी विरुद्ध है।
डेढ़ साल से बंद है आम लोगों के लिए गर्भगृह
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम लोगों का प्रवेश पिछले करीब डेढ़ साल से बंद है। दरअसल, 4 जुलाई 2023 को श्रावण मास के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने गर्भगृह में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई थी।
उस समय समिति ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि 11 सितंबर 2023 को सावन समाप्त होते ही व्यवस्था को बहाल कर दिया जाएगा। हालांकि, इस वादे के एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के द्वार नहीं खोले गए हैं।
महाकाल लोक के निर्माण के बाद बदली स्थितियां
मंदिर में भीड़ बढ़ने का एक मुख्य कारण ‘महाकाल लोक’ का निर्माण भी माना जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री द्वारा महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले मंदिर में प्रतिदिन औसतन 20 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे।
लोकार्पण के बाद यह संख्या चार से पांच गुना बढ़ गई है। वर्तमान में सामान्य दिनों में भी डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं, जिससे प्रबंधन के सामने सुरक्षा और सुगम दर्शन की चुनौती खड़ी हो गई है।
पुरानी व्यवस्था: पहले शुल्क लेकर मिलता था प्रवेश
जुलाई 2023 से पहले की व्यवस्था की बात करें तो मंदिर में 1500 रुपये की रसीद कटवाकर श्रद्धालु गर्भगृह में जाकर अभिषेक और पूजन कर सकते थे। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम भक्तों को केवल गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और नंदी हॉल से ही दर्शन कराए जा रहे है।
भक्तों की शिकायत है कि सशुल्क दर्शन की सुविधा भी अब केवल चुनिंदा लोगों या विशेष परिस्थितियों तक सीमित रह गई है, जबकि आम आदमी कतारों में लगकर भी गर्भगृह तक नहीं पहुंच पा रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई आवाज
गर्भगृह को आम जनता के लिए खोलने की मांग केवल कानूनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी उठ रही है। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर आम श्रद्धालुओं की भावनाओं से अवगत कराया था।
इसके अलावा, हाल ही में उज्जैन के महापौर ने भी सार्वजनिक रूप से मंदिर की वर्तमान दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने मांग की थी कि वीआईपी कल्चर को खत्म कर आम भक्तों को भी गर्भगृह से दर्शन करने का सौभाग्य मिलना चाहिए। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।