New Delhi:भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी निजी संपत्ति का आधार बन गया है। एसोचैम (ASSOCHAM) की हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में कुल 50,000 टन सोना जमा है। इस विशाल भंडार की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 10 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹830 लाख करोड़) आंकी गई है।
यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल सोने के भंडार को भी पीछे छोड़ देता है।
दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी भारतीय ‘स्वर्ण’
भारतीय परिवारों के पास मौजूद यह सोना न केवल निवेश है, बल्कि एक वैश्विक शक्ति का प्रतीक भी है।
GDP से तुलना: भारत के पास इतना सोना है कि इसकी कुल वैल्यू अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की सालाना जीडीपी (GDP) से कहीं अधिक है।
जीडीपी का 125%: कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच सोने की कीमतों में हुई ऐतिहासिक वृद्धि ने भारतीय घरों की वेल्थ को जबरदस्त मजबूती दी है। वर्तमान में घरों में रखा सोना भारत की कुल जीडीपी का लगभग 125% है।
बैंकों पर भरोसा कम, सोने पर ज्यादा: भारतीयों की बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में लगी कुल रकम की तुलना में सोने की वैल्यू 175% अधिक है। यानी आज भी भारतीय परिवारों की पहली पसंद निवेश के लिए सोना ही है।
सरकारी खजाने (RBI) बनाम प्राइवेट स्टॉक
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के डेटा के अनुसार, जहाँ भारतीय घरों में सोने का अंबार लगा है, वहीं भारत के सरकारी खजाने (RBI) में 880.3 टन सोना सुरक्षित है। सरकारी गोल्ड रिजर्व के मामले में भारत दुनिया में 8वें स्थान पर है। हालांकि, अमेरिका (8,133 टन) सरकारी भंडार में शीर्ष पर है, लेकिन जब बात प्राइवेट स्टॉक या ‘पीपल्स गोल्ड’ की आती है, तो भारत का कोई मुकाबला नहीं है।
2047 तक ‘विकसित भारत’ का रोडमैप: सोने को काम पर लगाने की तैयारी
एसोचैम का मानना है कि यदि घरों में रखे इस सोने को ‘डेड इन्वेस्टमेंट’ (निष्क्रिय निवेश) के बजाय बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा बना लिया जाए, तो भारत की तरक्की की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है।
मल्टीप्लायर इफेक्ट: यदि हर साल घरों में रखे सोने का मात्र 2% हिस्सा भी ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ या वित्तीय एसेट्स में बदल दिया जाए, तो साल 2047 तक भारत की जीडीपी में अतिरिक्त 7.5 ट्रिलियन डॉलर जुड़ सकते हैं।
लक्ष्य 41.5 ट्रिलियन: रिपोर्ट के अनुसार, 2047 तक भारत की अनुमानित 34 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, सोने के सही इस्तेमाल से 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
गोल्ड लोन का बढ़ता बाजार: ₹24 लाख करोड़ के पार
अब भारतीयों का नजरिया बदल रहा है। सोने को तिजोरी में बंद रखने के बजाय लोग अब इसे अपनी जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिटेल क्रेडिट में उछाल: नवंबर 2025 तक देश में गोल्ड लोन का आंकड़ा ₹24.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
मजबूरी नहीं, रणनीति: अब गोल्ड लोन केवल किसी आपात स्थिति या मजबूरी का सौदा नहीं रह गया है। लोग छोटे बिजनेस, खेती और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सोने के बदले कर्ज ले रहे हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
निष्कर्ष: भारतीय घरों में जमा यह ‘पीला सोना’ देश की सबसे बड़ी आर्थिक ढाल है। यदि सही नीतियों के माध्यम से इसे मुख्यधारा के वित्तीय तंत्र में लाया गया, तो भारत को दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक सकता।
नोट: आज 11 अप्रैल 2026 है, और सोने की मौजूदा कीमतों ने भारतीयों की संपत्ति को नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।