राज्यसभा में गूंजा धर्मांतरण का मुद्दा: Bjp सांसद की मांग-‘धर्म बदलने वाले आदिवासियों का खत्म हो आरक्षण’

New Delhi: राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान जनजातीय समाज की अस्मिता और आरक्षण के अधिकार को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने सदन में पुरजोर तरीके से मांग उठाई कि जो आदिवासी अपना धर्म बदल चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण के दायरे से बाहर कर ‘डी-लिस्ट’ किया जाना चाहिए।

MP: धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानून की मांग, राज्यसभा में सांसद सुमेर सिंह  सोलंकी ने उठाया मुद्दा – MP NEWS TV

“छल और प्रलोभन से धर्मांतरण एक अक्षम्य अपराध”
डॉ. सोलंकी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन आज आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर इलाज, मुफ्त शिक्षा और नौकरी का लालच देकर सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने इसे एक “अक्षम्य अपराध” करार देते हुए कहा कि यह न केवल एक सांस्कृतिक संकट है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और चिंता का विषय भी है।
आरक्षण की व्यवस्था में सुधार की मांग
सांसद ने तर्क दिया कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने से वास्तविक और पात्र आदिवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि:
  • अनुच्छेद 342 में संशोधन: संविधान के इस अनुच्छेद में बदलाव कर ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे मूल पहचान छोड़ने वालों को आरक्षण से वंचित किया जा सके।
  • SC वर्ग जैसी व्यवस्था: सोलंकी ने सुप्रीम कोर्ट के 24 मार्च 2026 के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था है, वैसी ही व्यवस्था ST वर्ग के लिए भी लागू होनी चाहिए।
‘एक देश, एक कानून’ की जरूरत
कानूनी पेचीदगियों पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे देश के लिए एक समान और सख्त केंद्रीय कानून बनाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, गांवों में बढ़ते सामाजिक तनाव को रोकने और जनजातीय संस्कृति की रक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।
डॉ. सोलंकी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसे आने वाले समय में आदिवासी राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।