उज्जैन महाकाल मंदिर में संध्या-शयन आरती पर 250-250 रूपए शुल्क, हिंदू उत्सव समिति ने PM को लिखा पत्र: सनातनियों की सरकार में ऐसा ठीक नहीं

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में संध्या आरती और शयन आरती के लिए प्रति व्यक्ति 250-250 रुपये शुल्क लागू किए जाने के फैसले पर धार्मिक संगठनों की आपत्ति सामने आई है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा है कि मंदिरों में टिकट आधारित दर्शन व्यवस्था से गलत संदेश जाएगा।
तिवारी ने कहा कि पहले मुगलों के शासन में जजिया कर और तीर्थ कर लिया जाता था, और अब यदि सनातनियों की सरकार में मंदिरों में दर्शन के लिए शुल्क तय होगा तो यह उचित नहीं माना जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश समेत देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर टिकट व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है।

“पहले जब मुगलों का शासन था तो जजिया कर और तीर्थ कर लिया जाता था, लेकिन आज सनातनियों की सरकार में मंदिरों में दर्शन के लिए शुल्क तय होगा, तो यह ठीक संदेश नहीं देगा।” — चंद्रशेखर तिवारी

हिंदू उत्सव समिति का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं। समिति ने मंदिरों में वीआईपी कल्चर और भुगतान आधारित प्राथमिकता दर्शन को खत्म करने की मांग दोहराई है।

“भगवान के दरबार में राजा और रंक बराबर होते हैं, ऐसे में मंदिरों में वीआईपी कल्चर और टिकट आधारित दर्शन व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए।” — चंद्रशेखर तिवारी

मंदिर प्रशासन का पक्ष: भीड़ नियंत्रण के लिए नई व्यवस्था
मंदिर प्रबंध समिति ने अपने फैसले के समर्थन में भीड़ प्रबंधन का तर्क दिया है। समिति के मुताबिक संध्या आरती और शयन आरती में लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रवेश को व्यवस्थित करना जरूरी था। इसी कारण ऑनलाइन बुकिंग और शुल्क प्रणाली लागू की गई है।
दोनों आरतियों के लिए बुकिंग केवल मंदिर की अधिकृत वेबसाइट से ही की जा सकेगी। समिति ने स्पष्ट किया है कि ऑफलाइन टिकट व्यवस्था उपलब्ध नहीं होगी और निर्धारित स्लॉट के अनुसार ही प्रवेश दिया जाएगा। बुकिंग के लिए अधिकृत लिंक https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ है।
मंदिर में पहले से भी कुछ सेवाओं के लिए शुल्क लागू है। भस्म आरती के ऑनलाइन प्रवेश के लिए 200 रुपये प्रति व्यक्ति लिए जा रहे हैं। शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क पहले से लागू है। प्रतिदिन करीब 1200 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन भस्म आरती प्रवेश दिया जाता है। सामान्य कतार के अलावा 250 रुपये देकर वीआईपी लाइन से दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है।
गर्भगृह प्रवेश अब भी सामान्य भक्तों के लिए बंद
मंदिर में गर्भगृह प्रवेश को लेकर भी स्थिति पहले जैसी बहाल नहीं हो सकी है। यह प्रवेश पहले 1500 रुपये शुल्क के साथ अनुमति आधारित था, लेकिन 4 जुलाई 2023 को सावन के दौरान बढ़ी भीड़ के कारण इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
उस समय कहा गया था कि सावन के बाद व्यवस्था बहाल की जाएगी। हालांकि अभी तक आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह प्रवेश दोबारा शुरू नहीं हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में आरती दर्शन पर नए शुल्क ने विवाद को और तेज कर दिया है। धार्मिक संगठनों और मंदिर प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुका था शुल्क का फैसला
इस फैसले को लेकर पहले भी सूचना सार्वजनिक हुई थी कि भस्म आरती की तरह संध्या और शयन आरती के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य की जाएगी। उस समय बताया गया था कि व्यवस्था गुरुवार से लागू कर दी गई है और शुल्क नहीं देने वाले श्रद्धालुओं को चलित दर्शन करना होगा।
अब औपचारिक रूप से लागू व्यवस्था के बाद विरोध और प्रशासनिक तर्क दोनों समानांतर चल रहे हैं। एक ओर समिति इसे प्रबंधन का उपाय बता रही है, दूसरी ओर धार्मिक संगठनों का तर्क है कि मंदिरों में दर्शन के लिए शुल्क आधारित प्राथमिकता व्यवस्था धार्मिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा में रह सकता है।