Indian Railways की अमृत भारत योजना के तहत देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक ग्वालियर रेलवे स्टेशन भी बड़े स्तर पर पुनर्विकास की प्रक्रिया से गुजर रहा है। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से इस जंक्शन को नया और भव्य रूप दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और स्टेशन की पहचान एक आधुनिक ट्रांजिट हब के रूप में स्थापित हो।
500 करोड़ की परियोजना: हाईटेक और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
स्टेशन के कायाकल्प में आधुनिक वेटिंग रूम, विशाल कॉनकोर्स एरिया, अत्याधुनिक लिफ्ट और एस्केलेटर, फूड कोर्ट और रूफ प्लाजा जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए बैठने की बेहतर व्यवस्था, साफ-सुथरे शौचालय और डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है। पूरा ढांचा इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधा और अनुभव मिल सके।
एयरपोर्ट स्टाइल डिजाइन: यात्रियों को मिलेगा नया अनुभव
ग्वालियर स्टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर आधुनिक सीटिंग अरेंजमेंट, बच्चों के खेलने के लिए विशेष क्षेत्र और सुव्यवस्थित दुकानों की श्रृंखला तैयार की जा रही है। स्टेशन परिसर को ज्यादा खुला, आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जा रहा है ताकि यात्रियों की आवाजाही सहज हो। व्यावसायिक स्पेस भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्टेशन एक मिनी कमर्शियल हब के रूप में उभरेगा।
क्षमता में बढ़ोतरी: 6 प्लेटफॉर्म और 1.5 लाख यात्रियों का प्रबंधन
पुनर्विकास के बाद स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ाकर 6 की जा रही है। इसके साथ ही प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित की जा रही है। ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के दौरान भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत सर्कुलेशन एरिया और बेहतर एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाए जा रहे हैं। इससे यातायात दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
सुरक्षा और तकनीक पर खास जोर: ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण
स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क, अत्याधुनिक स्मोक डिटेक्शन सिस्टम और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं। पुनर्विकास के तहत 19 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर लगाए जा रहे हैं, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी।
ऐतिहासिक पहचान से जुड़ाव: किले की थीम पर तैयार होगा स्टेशन
ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत को ध्यान में रखते हुए स्टेशन की वास्तुकला को शहर के प्रसिद्ध किले की झलक देने के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है। इससे स्टेशन न सिर्फ परिवहन केंद्र रहेगा, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसे एक प्रमुख टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।
जून 2026 तक लक्ष्य: तेजी से आगे बढ़ रहा काम
हालांकि परियोजना को पहले 2024 तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन अब संशोधित डेडलाइन अप्रैल से जून 2026 के बीच तय की गई है। निर्माण कार्य तेज गति से जारी है और आने वाले महीनों में स्टेशन का नया रूप पूरी तरह सामने आने की संभावना है। पुनर्विकास के बाद ग्वालियर रेलवे स्टेशन आधुनिकता, सुरक्षा और सुविधा का प्रतीक बनकर उभरेगा।