देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने प्रशासन और आमजन दोनों को चिंता में डाल दिया है। भागीरथ पुरा क्षेत्र में अचानक बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के साथ बीमार हो गए। देखते ही देखते हालात ऐसे बने कि करीब 35 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से पानी के स्वाद और गंध में बदलाव महसूस किया जा रहा था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि इसका असर इतना गंभीर होगा।
घटना सामने आते ही इलाके की पानी की टंकी संदेह के घेरे में आ गई है। प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि वार्ड और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे निर्माण और खुदाई कार्य के कारण गंदगी या सीवेज का पानी टंकी में मिल गया होगा, जिससे सप्लाई का पानी दूषित हो गया। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी गई है। टंकी और पाइपलाइन की स्थिति की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि दूषित पानी के स्रोत का सही-सही पता लगाया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। वहीं, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुद अस्पताल पहुंचे और भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों से इलाज की स्थिति की जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि किसी भी मरीज को इलाज में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा कि इस घटना में बीमार हुए सभी लोगों के इलाज का पूरा खर्च प्रशासन वहन करेगा। जिन मरीजों या उनके परिजनों ने इलाज के लिए पहले से पैसे जमा कर दिए हैं, उन्हें भी राशि वापस की जाएगी। प्रशासन ने क्षेत्र में एहतियातन पानी की सप्लाई बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके। साथ ही, जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात भी कही गई है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और लोगों का भरोसा बना रहे।