जबलपुर हाईकोर्ट में बाबासाहेब अम्बेडकर पर कथित टिप्पणी का विरोध करने पर आदिवासी वकील से मारपीट, कई अधिवक्ताओं पर गंभीर आरोप

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर में मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को एक आदिवासी अधिवक्ता के साथ बेरहमी से मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्वालियर के वकील अनिल मिश्रा और हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों सहित लगभग 15 से 20 वकीलों ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग पर अपमानजनक टिप्पणी की, जिसका विरोध करने पर आदिवासी वकील रूप सिंह मरावी पर हमला कर दिया गया।

इस घटना ने हाईकोर्ट परिसर में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है और वकीलों के बीच जातीय संघर्ष की आशंका को गहरा दिया है। पीड़ित पक्ष ने सिविल लाइंस थाने पर रिपोर्ट दर्ज न करने का भी आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों परितोष त्रिवेदी और निखिल तिवारी द्वारा एक सम्मान कार्यक्रम के लिए जबलपुर आमंत्रित किया गया था। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे, एडवोकेट जनरल ऑफिस के सामने अनिल मिश्रा अपने साथी वकीलों के साथ खड़े थे।

ज्ञापन में दिए गए आरोपों के मुताबिक, इस समूह में डिप्टी एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा, सरकारी वकील सी.एम. तिवारी, बार के सचिव पारितोष त्रिवेदी, निखिल तिवारी, ब्रह्मानंद पांडे और एम.के. तिवारी समेत कई अन्य वकील शामिल थे। आरोप है कि यह समूह डॉ. अम्बेडकर और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा था।

विरोध करने पर की गई मारपीट

पास में ही खड़े आदिवासी अधिवक्ता रूप सिंह मरावी ने जब इन टिप्पणियों का विरोध किया और उन्हें ऐसा करने से रोका, तो कथित तौर पर वहां मौजूद सभी वकीलों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया। शिकायत के अनुसार, रूप सिंह मरावी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

घटना के बाद जब पीड़ित वकील सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे, तो थाना प्रभारी नामदेव ने कथित तौर पर रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में जब कई सामाजिक संगठनों के लोग थाने पहुंचे, तब जाकर पुलिस ने केवल एक आवेदन लेकर उन्हें वापस भेज दिया।

आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

इस पूरी घटना को लेकर मध्य प्रदेश एस.सी./एस.टी./ओ.बी.सी. एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने एक ज्ञापन जारी कर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि सामाजिक माहौल बिगाड़ने और वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने के आरोपी वकील अनिल मिश्रा और उनके सभी साथी अधिवक्ताओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि न्याय हो सके।