सर्दियों के मौसम में तुलसी का पौधा सूखने की समस्या आम है। कई घरों में तुलसी की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। ठंड के कारण पौधे की वृद्धि धीमी हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही देखभाल से पौधे को बचाया जा सकता है। घरेलू खाद का उपयोग पौधे के लिए फायदेमंद होता है। रासायनिक उर्वरकों की तुलना में प्राकृतिक खाद अधिक सुरक्षित है।
सर्दियों में तुलसी की देखभाल
तुलसी का पौधा ठंड के प्रति संवेदनशील होता है। रात के समय तापमान गिरने से पौधे को नुकसान पहुंचता है। पौधे को धूप वाली जगह पर रखना चाहिए।
पानी की मात्रा नियंत्रित रखनी जरूरी है। सर्दियों में अधिक पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं। मिट्टी सूखने पर ही पानी दें।
पौधे को तेज हवा से बचाना चाहिए। रात में पौधे को घर के अंदर या सुरक्षित जगह पर रखें। सुबह की धूप पौधे के लिए लाभकारी होती है।
घर पर बनाएं जैविक खाद
रसोई के कचरे से उत्तम खाद तैयार की जा सकती है। सब्जियों के छिलके और फलों के टुकड़े उपयोगी हैं। इन्हें मिट्टी में मिलाकर खाद बनाई जाती है।
केले के छिलके में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे सुखाकर पाउडर बना लें। मिट्टी में मिलाने से पौधे को पोषण मिलता है।
अंडे के छिलके कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं। इन्हें पीसकर मिट्टी में डालें। चाय की पत्ती भी खाद के रूप में काम करती है।
प्याज और लहसुन का घोल
प्याज और लहसुन का पानी पौधे के लिए फायदेमंद है। एक लीटर पानी में दो प्याज और चार लहसुन की कलियां मिलाएं। इसे रात भर रखने के बाद पौधे में डालें।
यह घोल कीटों से भी बचाता है। हर दस दिन में एक बार उपयोग करें। पौधे की जड़ों में सीधे डालना चाहिए।
गोबर और वर्मीकम्पोस्ट खाद
गोबर की खाद पारंपरिक और प्रभावी है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। पौधे के आसपास की मिट्टी में मिलाएं।
वर्मीकम्पोस्ट केंचुओं द्वारा बनाई गई खाद है। यह मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाती है। महीने में एक बार उपयोग करना पर्याप्त है।
नीम की खली भी उत्तम विकल्प है। यह कीटनाशक का काम भी करती है। मिट्टी में मिलाकर हल्का पानी दें।
पत्तियां पीली पड़ने पर क्या करें
पीली पत्तियों को तुरंत हटा देना चाहिए। यह संक्रमण फैलने से रोकता है। पौधे की छंटाई नियमित करें।
आयरन की कमी से भी पत्तियां पीली होती हैं। जंग लगे लोहे के टुकड़े मिट्टी में डालें। यह प्राकृतिक आयरन सप्लीमेंट का काम करता है।
मैग्नीशियम सल्फेट का घोल भी लाभदायक है। एक लीटर पानी में एक चम्मच मिलाएं। महीने में दो बार पौधे में डालें।
धूप और स्थान का चुनाव
तुलसी को कम से कम छह घंटे धूप चाहिए। दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें। खिड़की के पास रखना उचित रहता है।
गमले में जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है। नीचे छेद होना अनिवार्य है। पानी जमा होने से जड़ें खराब हो जाती हैं।
मिट्टी में रेत मिलाने से जल निकासी बेहतर होती है। कोकोपीट का उपयोग भी किया जा सकता है। मिट्टी हल्की और भुरभुरी होनी चाहिए।
नियमित निगरानी जरूरी
पौधे की प्रतिदिन जांच करें। कीड़ों या बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत उपाय करें। नीम के तेल का छिड़काव कारगर है।
सर्दियों में विशेष सावधानी बरतें। पाला पड़ने की संभावना हो तो पौधे को ढक दें। पॉलीथीन या कपड़े का उपयोग करें।
तुलसी का पौधा धार्मिक और औषधीय महत्व रखता है। सही देखभाल से यह साल भर हरा-भरा रह सकता है। घरेलू उपाय सस्ते और प्रभावी हैं।